काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए चयनित संपत्तियों में से करीब 98 प्रतिशत संपत्तियां खरीद ली गई हैं। जो संपत्तियां बची हैं, उनका प्रकरण या तो कोर्ट में लंबित है या फिर मालिकों ने दोबारा मूल्यांकन के लिए आवेदन कर रखा है। उधर, अधिकतम संपत्तियों की रजिस्ट्री होने के बाद मंदिर प्रशासन निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए कागजी कार्रवाई और भवनों के ध्वस्तीकरण के कार्य में जुट गया है।
बाबा दरबार से लेकर मर्णिकर्णिका घाट और मीर घाट तक बनने वाले करीब 25 हजार वर्ग मीटर के इस कॉरिडोर के लिए भवनों को खरीदने का काम लगभग पूरा हो चुका है, इसलिए मंदिर प्रशासन ने कागजी दस्तावेज पूरे तैयार करने में जुट गया है। आठ जनवरी को होने वाली अगली कैबिनेट की बैठक में इसके नक्शे को रखा जाएगा। नक्शा पास होने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
उधर, खरीदे गए भवनों को तोड़ने का काम चल रहा है। चूंकि 10 -12 दिन बाद मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री कॉरिडोर क्षेत्र का निरीक्षण करने आएंगे, ऐसे में उनके आने से पहले घाट से लेकर मंदिर तक पूरे भवन तोड़ने पर जोर है। इसके लिए बुधवार को चार जेसीबी और करीब 20 ट्रैक्टर ट्रॉली मलबा हटाने के काम में लगाए गए हैं। एक दो दिन में इनकी संख्या दोगुनी कर दी जाएगी, ताकि मलबा पूरी तरह से हटाया जा सके।
उधर, कॉरिडोर क्षेत्र में कुल 296 संपत्तियों को शामिल किया गया है। इसमें 13 मंदिर, 21 सेवईत के भवन, 31 ट्रस्ट और 227 निजी संपत्तियों के अलावा दो शौचालय, एक विद्यालय और एक धर्मशाला शामिल है। इसमें 279 संपत्तियों को ही खरीदना था। मंदिर कॉरिडोर ने अब तक करीब 270 संपत्तियां खरीद ली हैं।
मंदिर के सीईओ विशाल सिंह ने बताया कि संपत्तियां खरीदने में 216 करोड़ खर्च हो चुके हैं। जल्द ही बाकी संपत्तियों को भी सरकारी प्रक्रिया पूरी करके राज्यपाल के नाम कर दिया जाएगा।