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12 माह से चल रहा नौ सौ मीटर सीवर लाइन डालने का काम

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वाराणसी। नौ दिन चले अढ़ाई कोस। कुछ इसी तर्ज पर सिगरा-महमूरगंज मार्ग पर सीवर पाइप लाइन का काम चल रहा है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, जलकल और पीडब्ल्यूडी में समन्वय नहीं होने से नौ सौ मीटर पाइप डालने का काम चार साल से चल रहा है। यही नहीं, लापरवाही के कारण कहीं पाइप ऊंची है तो कहीं नीची। इन सबका नतीजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है और सिगरा जाने वालों को लंबा चक्कर लगाना पड़ा रहा है। साथ ही व्यापारियों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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सिगरा-महमूरगंज मार्ग पर सीवर लाइन के काम के कारण सड़क बदहाल हो चुकी है। मार्च 2018 में यहां काम शुरू हुआ। बरसात से पहले इसे पूरा किया जाना था, लेकिन साल भर बाद भी काम अधूरा है। प्रवासी भारतीय दिवस के दौरान बिना काम पूरा कराए 75 फीसदी सड़क बनवा दी गई। इसके बाद व्यापारियों ने आंदोलन किया तो काम दोबारा शुरू हुआ और होटल पद्मिनी व संतूर के सामने गढ्ढा करके छोड़ दिया गया। इससे एक मकान और बिजली का पोल धराशायी होने की स्थिति में पहुंच गया है। होटल संतूर के सामने बिना लेवल मिलाए पाइप लाइन डाल दी गई है। नतीजा यह हुआ कि महमूरगंज से सिगरा आ रही पाइपलाइन की ऊंचाई में लगभग तीन फीट का अंतर आ गया। निरीक्षण के बाद कमिश्नर ने जांच के बाद इसे दुरुस्त करने का निर्देश दिया।
पानी की भी समस्या
पाइप लाइन डालने के दौरान आए दिन पेयजल पाइप लाइन टूट रही है। चार दिन पहले मेन पाइप लाइन टूटने से शहर के कई इलाकों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। सूत्रों के अनुसार, पेयजल पाइप लाइन की पूरी जानकारी किए बिना ही ड्रिलिंग की जाती है, जिससे पेयजल पाइप लाइनें टूट रहीं हैं।
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व्यापार हो रहा प्रभावित
सिगरा महमूरगंज व्यापार मंडल के संरक्षक संजीव सिंह बिल्लू और व्यापारी सोमनाथ ने बताया कि विभागों की मनमानी का खामियाजा आम जनता तो भुगत ही रही है, सड़क बदहाल होने से व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। पिछले एक साल से हम सभी लोग समस्या को झेल रहे हैं, लेकिन न तो अधिकारी और न जनप्रतिनिधि सुध ले रहे हैं।
कोट-----
पेयजल पाइप लाइनों का जाल होने के कारण काम करने में परेशानियां आ रही हैं। काम शुरू करते ही पेयजल पाइप लाइन फूट जा रही है। इसी कारण काम धीमी गति से चल रहा है। -एसके राय, जीएम, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई
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