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बीसीसीआई के पहले अध्यक्ष विज्जी को दी गई श्रद्धांजलि

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वाराणसी। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पहले अध्यक्ष महाराज कुमार विजयानगरम् डॉ. विजयानंद गजपति उर्फ विज्जी की भेलूपुर चौराहा स्थित प्रतिमा पर सोमवार को देश भर से आए दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ियों ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही 25 से 27 दिसंबर तक शहर में आयोजित होने वाले टी-20 नेशनल दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता अटल-अजीत मेमोरियल ट्राफी का आगाज किया गया।
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श्रद्धांजलि सभा के दौरान मौजूद खिलाड़ियों और लोगोें को संबोधित करते हुए क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजन समिति के चेयरमैन डॉ. संजय चौरसिया ने कहा कि विज्जी भारतीय क्रिकेट के गौरवमयी इतिहास के अभिन्न अंग रहे हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि जिले के प्रथम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर टूर्नामेंट की शुरुआत की जा रही है। सभा की अध्यक्षता पूर्वांचल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. उत्तम ओझा ने और आभार अजय यादव ने जताया। इस दौरान जावेद अख्तर, कुंवर वेंकटेश, पीटी आनंद मिश्रा, डॉ. सुनील मिश्रा, डॉ. तुलसी, बृजेश पाठक, आशुतोष प्रजापति, मदन मोहन वर्मा, श्याम लाल, सुमित सिंह आदि मौजूद रहे।
1934 में इंग्लैंड की एमसीसी को हराया
काशी और क्रिकेट का बहुत पुराना नाता रहा है। विजयानगरम् पैलेस के विशाल बगीचे को खेल के मैदान में तब्दील कर 10 जनवरी 1934 को विजयानगरम् एलेवन और इंग्लैंड की एमसीसी टीम के बीच मैच खेला गया। एमसीसी की टीम ने पहली पारी में 113 और दूसरी पारी में 139 रन बनाए। वहीं, महाराज कुमार विजयानगरम् उर्फ विज्जी की कप्तानी में खेलने उतरी भारतीय टीम ने पहली पारी में 13 और दूसरी पारी में एक रन से विजय हासिल कर अंग्रेजों की टीम को हक्काबक्का कर दिया। एमसीसी की हार ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी।
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मैच की पूर्व संध्या पर विज्जी ने महारानी भागीरथी देवी से कहा था कि यह मैच एक ओर देश की आन, बान और शान का प्रश्न है तो दूसरी ओर विजयानगरम् और बनारस का...। मैं इस मैच को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता हूं। 28 दिसंबर 1905 को काशी के केदार खंड में जन्मे विज्जी के खेल सिद्धांत से ही प्रभावित होकर 1935 में उन्हें महामना पं. मदन मोहन मालवीय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय कोर्ट और कार्यसमिति का सदस्य बनाया था। साथ ही विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें ब्लू रीबन दिया गया।
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