वाराणसी। बीएचयू शिक्षा संकाय की स्थापना के 100 साल पूरा होने पर चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन धर्म और शिक्षा पर विस्तृत चर्चा हुई। पहले सत्र में जहां प्रतिभागियों ने पोस्टर प्रदर्शनी के माध्यम से इस ओर सभी का ध्यान आकृष्ट किया वहीं दूसरे सत्र में बतौर मुख्य अतिथि स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के योग गुरु डॉ. के सुब्रमण्यम ने कहा कि वैश्विक शांति के लिए शिक्षा सबसे बड़ी जरूरत है। अगर किसी को शिक्षा से वंचित कर दिया गया तो उसका दुष्प्रभाव पड़ता है।
चाणक्य सभागार में आयोजित सार्वभौमिक धर्म और शिक्षा विषय पर बोलते हुए डॉ. सुब्रमण्यम ने कहा कि सार्वभौमिक धर्म के लिए विश्वास, प्रेम व तर्क का अहम स्थान है, योग शिक्षा का आधार भी है। योग के लिए यम और नियम अनिवार्य हैं जो इस समय गौण हो गए हैं। इस पर विशेष ध्यान देना होगा। बीएचयू अंतर विश्वविद्यालयी शिक्षक शिक्षा केंद्र के निदेशक प्रो. बीके त्रिपाठी ने योग शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर देते हुए शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को जरूरी बताया। इसके बाद आयोजित कार्यक्रम में जगदगुरु रामानंदाचार्य रामनरेशाचार्य ने सनातन धर्म के वैश्विक मूल्यों के साथ ही संस्कृति पर चर्चा की। केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान के कुलपति प्रो. गेसे नवांग समतेन ने बौद्ध दर्शन, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. मुफ्ती जाहिद अली खान ने इस्लाम दर्शन, फादर जोसेफ सत्यानंद ने ईसाई दर्शन पर प्रकाश डाला। अतिथियों का स्वागत संकाय प्रमुख प्रो. आरपी शुक्ला ने किया। कार्यक्रम में डॉ.आलोक गार्डिया, प्रो. अर्जुन तिवारी, प्रो. सुनील सिंह आदि मौजूद रहे।