गेरुआ धारण करने से कोई नहीं बन जाता हिंदू
बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, पीएम-सीएम को पत्र लिखकर ध्वस्तीकरण पर मांगा जवाब
विश्वनाथ कॉरिडोर योजना के तहत प्राचीन भवनों और मंदिरों को ढहाए जाने से नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गेरुआ वस्त्र धारण करने से कोई हिंदू नहीं हो जाता। गेरुआ वस्त्र धारण करके तो रावण ने भी माता सीता का हरण किया था। प्रदेश के मुखिया अगर सनातन धर्म के रक्षक हैं तो वह आकर हमारी पीड़ा को समझें। बताएं कि काशी के पुरातन मंदिरों के साथ इस तरह का बर्ताव क्यों किया जा रहा है।
विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के तहत ढहाए जा रहे मकानों और मंदिरों के निरीक्षण के बाद बुधवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने ये बातें कहीं। केदारघाट स्थित श्री विद्यामठ में पत्रकाराें से बातचीत में उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर उनसे मिलने के लिए समय मांगा है। कहा कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से सनातन धर्मियों की आस्था और काशी के मूल स्वरूप को ठेस पहुंची है। काशी की अंतरगृही यात्रा सर्वाधिक महत्व की यात्रा है। यह यात्रा जिन पांच गणेश के दर्शन से आरंभ होती है, उनमें से तीन
सुमुख विनायक, दुर्मुख विनायक और प्रमोद विनायक को गिराकर विग्रह भी जमींदोज कर दिए गए। इस धर्म विरुद्ध कार्य को सहन नहीं किया जाएगा। बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री, राज्यपाल, गृह मंत्रालय और कमिश्नर को पत्र भेजा है। जल्द ही काशी के संत समाज की एक आपात बैठक होगी और इस मसले पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।