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जिले में मिड डे मील की व्यवस् था चरमराई

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ज्ञानपुर। जिले में एमडीएम व्यवस्था बेपटरी हो गई है। सौ से अधिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनना बंद हो गया है। वहीं, जहां बन रहा है, वहां गुणवत्ता और मेन्यू का ध्यान कतई नहीं रखा जा रहा। कहीं, बच्चों को सिर्फ खिचड़ी परोस कर काम चलाया जा रहा है तो कहीं कढ़ी-चावल। ग्राम प्रधान और विद्यालयों के प्रधानाध्यापक मिड-डे-मील में जमकर खेल कर अपनी जेबें भर रहे हैं। विभाग के अधिकारी भी इस खेल में शामिल हैं, जिन्हें हर महीने कमीशन की रकम पहुंच जाती है।
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जिले के कुल 1151 विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को मध्याह्न भोजन दिया जाता है। कुल डेढ़ लाख बच्चों के भोजन पर हर महीने सरकार बड़ी धनराशि खर्च करती है। जिले में हर महीने एमडीएम पर परिवर्तन लागत (कनवर्जन कास्ट) के रूप में 90 लाख रुपये खर्च होते हैं। साथ ही हर महीने एक हजार क्विंटल अनाज की भी खपत होती है। प्राथमिक विद्यालय के एक बच्चे पर 4.13 रुपये और पूर्व माध्यमिक विद्यालय के एक बच्चे पर 6.18 रुपये खर्च किए जाते हैं। सप्ताह में एक दिन फल का वितरण भी किया जाता है। फल के लिए प्रति बच्चे शासन की ओर से चार रुपये दिए जाते हैं।
हर माह भारी खर्च होने के बाद भी डीघ, अभोली और भदोही ब्लॉकों के 100 से अधिक विद्यालयों में एमडीएम नहीं बन रहा है। प्रधान और विद्यालय के प्रधानाध्यापक बच्चों के भोजन के पैसे को डकार रहे हैं। यही नहीं लगभग सभी विद्यालयों में निर्धारित मेन्यू का उल्लंघन किया जा रहा है। शासन ने सप्ताह में हर दिन के लिए भोजन का मेन्यू निर्धारित किया है। किसी दिन चावल और सब्जी युक्त दाल, किसी दिन रोटी और सब्जी आदि तय किए जा गए हैं। बच्चों को पोषण देने के लिए हफ्ते में लगभग चार दिन सब्जी या तहरी में सोयाबीन बड़ी का इस्तेमाल भी मेन्यू में शामिल है। मगर ज्यादातर दिनों में बच्चों को सादी खिचड़ी खिलाई जा रही है। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सबकुछ जानते हुए भी बेसिक शिक्षा विभाग मौन बना हुआ है।
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