वाराणसी। नोटा ने सियासी मैदान में ताल ठोंकने वाली पार्टियों के नेताओं की नींद उड़ा रखी है। चट्टी चौराहों पर नोटा की वकालत करने वालों को पार्टी के नेता समझाने में लगे हैं कि बेहतर लोकतंत्र के लिए नोटा अच्छा नहीं है। इससे अच्छा सर्वोत्तम प्रत्याशी को वोट दिया जाए।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान 20 से अधिक सीटों पर नोटा ने प्रभाव डाला था। इन सीटों पर प्रत्याशियों के बीच हार जीत का अंतर नोटा से कम था। इसी कारण राजनीतिक पार्टियों में नोटा को लेकर हलचल है। चुनावी मैदान में एक दूसरे को पटखनी देने की जुगत में लगीं पार्टियां जनता को नोटा के नुकसान भी बता रही हैं। उधर, कुछ सामाजिक संगठन ऐसे भी हैं जो असंतुष्ट होने पर नोटा बटन दबाने की अपील कर रहे हैं।