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‘सब बन फूले महके...’ बंदिश पर श्रोता मंत्रमुग्ध

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वाराणसी। संगीत और नृत्य कला की उत्तम अभिव्यक्ति है, यह अंतरात्मा को प्रकाशित करने में सक्षम है। संगीत की राह आत्मा को परमात्मा तक पहुंचाती है। यह कहना है मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह का। रविवार को शिवपुर-तरना स्थित नवसाधना कला केंद्र के 21 वें दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि संगीत हमें अमरता प्रदान करने में सक्षम है। विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध गायक पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नृत्य-संगीत को सीखने के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ी है। साधना में भक्ति भाव साधकों को नई ऊंचाई पर ले जाता है।
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दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता बिशप डॉ. यूजिन जोसफ ने की। स्वागत नवसाधना कला केंद्र के प्राचार्य डॉ. फादर विल्फ्रेड मोरस ने किया। शुभारंभ राग बागेश्री में मां शारदा की स्तुति श्लोक ‘सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने।’ से हुआ। कार्यक्रम के अंत में ‘रंग बिरंगे फूलों सा, एक गुलिस्ता देश मेरा’ के बोल पर आठ राज्यों के सतरंगी छटा बिखेरी । नवसाधना की ओर से नृत्य नाटिका ‘योना’ व अंतिम न्याय’ जीवन का स्रोत, और दीपशिखा से संयोजित डीवीडी का विमोचन किया गया।
भरतनाट्यम की कलाकार एस सरल और प्रसिद्ध सितार वादक प्रो. विदुशी कृष्ण चक्रवर्ती को प्रिंटानिया पुरस्कार-2018 से सम्मानित किया गया। 2017-18 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कला साधक राहुल, अक्षत एवं ज्योति प्रिया को सम्मानित किया। मंच संचालन डॉ. राम सुधार सिंह ने किया।
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