वाराणसी। अलग भाषा, संस्कृति के दर्शक और कलाकार जब रूबरू हुए तो हर किसी ने महसूस किया कि थिएटर भाषा की परिधि से बाहर का फलक उपलब्ध कराता है। भारत रंग महोत्सव की दूसरी निशा में रूस के कलाकारों ने तातार भाषा में नाटक का मंचन किया। दर्शक भी कलाकारों की भाव भंगिमाओं से अंत तक नाटक से बंधे रहे। रसियन लेखक सुम्बेल जाफारोवा के नाटक एलियन में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान लौह पार्श्व के गिरने और यूएसएसआर के ध्वस्त होने के घटनाक्रम को मंचित किया गया।
नाटक के निर्देशक फरीद बिक्चान्ताएव ने कहा कि, यह महोत्सव हमारे लिए एक बेहतरीन अवसर था जहां हमें पूरी तरह से अलग भाषा व संस्कृति के दर्शकों के सामने प्रदर्शन का अवसर मिला। थिएटर के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह उसी भाषा में व्यक्त किया जाए जो उसके दर्शकों को समझ में आए। थिएटर की भाषा सिर्फ मौखिक नहीं होती है।