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प्रात कहा मुनि सन रघुराई निर्भय जग्य करहु तुम्ह जाई

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रामनगर। साधना में जुटे साधु- संतों पर अत्याचार करने वाली ताड़का को भगवान राम ने एक ही बाण में परलोक पहुंचा दिया। सुबाहु भी मारा गया। राक्षसों के आतंक से मुक्ति पाकर गिरि कंदरा में यज्ञ - हवन कर रहे साधु- संत प्रफुल्लित हो उठे और महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम की जय जयकारे लगाने लगे। इसके बाद सीता स्वयंवर के लिए महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जनकपुर पहुंचते हैं। जहां बुधवार को धूमधाम से स्वयंवर होगा।
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रामनगर की रामलीला में तीसरे दिन मंगलवार को राक्षसों से परेशान विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ के दरबार में पहुंचते हैं और उनसे उनके दो पुत्रों को मांग बैठते हैं। दशरथ पहले तो इनकार करते हैं लेकिन गुरु वशिष्ठ के समझाने पर वह राम और लक्ष्मण को उनके साथ भेज देते हैं। मुनि विश्वामित्र के साथ गए दोनों भाई उनके यज्ञ की रक्षा करते हुए ताड़का और सुबाहु को युद्ध में मार गिराते हैं। राक्षसों के मारे जाने पर विश्वामित्र की चिंता दूर हो जाती है। दोनों भाइयों की साधु-संतों के साथ देवता भी जय-जयकार करने लगते हैं।
रास्ते में एक आश्रम को देखकर दोनों भाई आश्रम और रास्ते में पड़ी एक शिला के बारे में मुनि विश्वामित्र से पूछते हैं। विश्वामित्र बताते हैं कि श्राप के कारण गौतम मुनि की पत्नी अहिल्या शिला बन गई हैं। मुनि के कहने पर भगवान अपने पैर से छूकर उन्हें श्राप से मुक्त कर देते हैं। अहिल्या उनके चरणों में गिरकर स्वर्गलोक चली जाती हैं। दोनों भाई गंगा दर्शन करने के बाद जनकपुर पहुंचते हैं। मुनि के साथ भोजन करके सभी विश्राम करते हैं। यहीं पर आरती के बाद लीला को विश्राम दे दिया जाता है।
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मुस्लिम इलाके में भी रहा उत्साह
रामनगर । रामनगर की रामलीला में ताड़का वध की लीला ऐसी है जो मुस्लिम इलाके वारी गढ़ही से होकर गुजरती है। मंशा देवी मंदिर के बगल की गली से होकर वारी गढ़ही से होते हुए ताड़का वध स्थल लीला वाजदापुर पहुंची। इस दौरान मुस्लिम बंधु खासा उत्साहित रहे। लीला स्थल पर मेले जैसा नजारा रहा।
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