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वीसी से मिलने गए छात्रों को रोका, नोकझोंक

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वाराणसी। बीएचयू प्रशासन की ओर से दो साल के भीतर मारपीट की घटनाओं में संलिप्त छात्रों को प्रवेश से रोके जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को प्रशासन के इस फैसले के विरोध में कुलपति से मिलने गए छात्रों की मुलाकात नहीं हो पाई। आरोप है कि यहां चीफ प्रॉक्टर ने छात्रों को रोका और सभी से परिचय पत्र मांगने लगी। इसको लेकर छात्रों की चीफ प्रॉक्टर से नोकझोंक भी हुई और वे बिना कुलपति से मिले लौट आए।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले दो साल 2016, 2017 में मारपीट की घटनाओं को आधार बनाते हुए 56 छात्रों के दुबारा प्रवेश पर रोक लगाते हुए आदेश की कॉपी संकायों, विभागों के प्रमुख समेत अन्य अधिकारियों को भेजी थी। इधर इसकी जानकारी जैसे ही छात्रों को हुई तो वे आक्रोशित हो उठे। इसमें बहुत से छात्रों ने अभी हाल ही में प्रवेश लिया है तो कुछ लेने की तैयारी में थे। गुरुवार को करीब दस की संख्या में छात्र कुलपति से मिलकर समस्या बताने गए थे। कुलपति कार्यालय में कुछ देर बैठने के बाद जब उन्हें अंदर बुलाया गया तो वह जैसे ही आगे बढ़े थे कि वहां मौजूद चीफ प्रॉक्टर ने सभी से परिचय पत्र मांगा, यह बात छात्रों को नागवार लगी। इसी बात को लेकर छात्रों और चीफ प्रॉक्टर के बीच नोकझोंक हो गई, लिहाजा वह कुलपति से नहीं मिल सके। बाहर आए छात्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय ने द्वेष की भावना से छात्रों के विरोध में यह फैसला लिया है। अब जब कुलपति से मिलकर अपनी समस्या बताने गए तो वहां मिलने से रोका जो अन्याय है। चर्चा इस बात की है कि शाम को पीड़ित एक छात्र दुबारा गया और कुलपति से किसी तरह मिलकर अपनी समस्या बताई।
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