ज्ञानपुर। मौसम के अचानक करवट लेने से किसानों की धुकधकी बढ़ गई है। गुरुवार को सुबह ही आसमान में काले बादल छा गए और आंधी-बारिश से गेहूं की फसल के बर्बाद होने की आशंका से किसान चिंतित हो उठे। इस समय गेहूं और सरसो की पकी फसल खेतों में खड़ी है। यदि आंधी चली या बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई तो किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।
सुबह पौ फटी तो जिले का मौसम बदला-बदला दिखा। आसमान में बादलों की उमड़-घुमड़ के चलते देर तक सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। 10 बजे के आसपास थोड़ी देर के लिए भगवान भाष्कर ने बादलों की ओट से धरती की ओर झांका, लेकिन देखते ही देखते फिर बादलों ने उन्हें ढंक लिया। इसके बाद पूरे दिन बदली का वातावरण बना रहा और धुंध छाई रही। इससे आंधी-पानी की आशंका बन गई। मौसम का यह नजारा देखकर किसानों की पेशानी पर बल पड़ गया। मौसम के रुख को देखते हुए देर रात तक बारिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा था। इस दौरान 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलीं। किसान आंधी और ओले की आशंका में चिंतित नजर आए। जिला मुख्यालय से लगे गांव लखनो के किसान परमानंद उपाध्याय ने कहा कि इस समय बारिश के साथ आंधी और ओले गिरने की पूरी आशंका रहती है। ऐसे में तैयार गेहूं, सरसों, अरहर, मसूर आदि फसलें चौपट हो जाएंगी। जोरई निवासी किसान राजपति यादव ने कहा कि अरहर के फूल झड़ जाएंगे। सरसों की फसल के लिए यह मौसम बिल्कुल भी मुफीद नहीं है। देवाजीतपुर निवासी भोलानाथ उपाध्याय ने कहा कि तमाम किसानों की दलहनी और तिलहनी फसल तैयार होकर खेत या खलिहान में पड़ी है। ऐसे में अगर आंधी और ओले का पात हुआ तो किसानों की कमर टूट जाएगी।
इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी ने कहा कि मौसम का रुख किसानों की चिंता बढ़ाने वाला है। लेकिन, केवल बारिश भर हुई तो नुकसान नहीं, बल्कि फायदा ही होगा। हां, बारिश के साथ आंधी और ओले गिरे तो ज्यादा नुकसान हो जाएगा।