भदोही। मैं कौन हूं? इस बारे में हर किसी को चिंतन करना चाहिए। यदि हम इस रहस्य को समझ लें तो हमारे अंदर असीम शक्तियां जागृत हो जाएंगी। आत्मशक्ति की पहचान ही मानसिक चिंताओं और समस्याओं का समाधान है। ये बातें पूनम बहन ने सनबीम स्कूल भदोही के प्रांगण में चल रहे अलविदा तनाव शिविर के तीसरे दिन साधकों को बताई। तीसरे दिन शिविर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
पूनम बहन ने कहा कि हम सागर की गहराई तक जाना चाहते हैं। आकाश की ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं। चंद्रमा पर पहुंच गए हैं। लेकिन, विडंबना है कि हम स्वयं को नहीं समझ सके कि हम क्या हैं? जिस दिन हम अपने को पहचान लेंगे, उस दिन हमारी समस्याओं का अंत हो जाएगा। फिर असंभव कार्य संभव होते जाएंगे। उन्होंने लोगों को बताया कि सिकंदर महान केवल एक बात से महान बना। उसने अपने अंदर से असंभव शब्द को हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दिया था। यह बात सब पर लागू होती है। बताया कि खुद को शरीर न समझें। जब खुद को शरीर समझेंगे तो आत्मा गुलाम हो जाएगी और तब समस्याएं शुरू हो जाएंगी। हमारा अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण नहीं रह गया है। मुख से कुछ भी बोल देते हैं। इससे छोटी-छोटी बात पर क्रोध आता है और संबंध बिगड़ने लगते हैं।
तीसरे दिन मेडिटेशन के माध्यम से आत्मशक्ति की पहचान का अनुभव कराया कि वास्तव में मैं महज शरीर नहीं हूं, अपितु अजर, अमर, अविनाशी आत्मा हूं। मेडिटेशन के इस सत्र में साधक अपना सुध बुध खोकर असीम सुख के सागर में खो गए। इस सत्र के बाद लोगों ने समझा कि आत्म सर्वोपरि होती है। वह जो चाहे आपसे करवा सकती है। लोगों में एक नई शक्ति का संचार हुआ। लोगों ने समझा कि ज्यादा सोचने से समस्या और बिगड़ जाती है। इसलिए चिंता छोड़कर तनावमुक्त रहना चाहिए।