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डीआरएम कार्यालय को सौंपी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट

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वाराणसी। सिटी रेलवे स्टेशन के पीछे स्थित पूर्वोत्तर रेलवे के सिगनल विभाग के गोदाम में मंगलवार की रात लगी भीषण आग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट गुरुवार को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय को सौंप दी गई। यह प्रारंभिक जांच सिगनल विभाग की ओर से कराई गई है। गोदाम परिसर की बाउंड्री के क्षतिग्रस्त हिस्से से अराजकतत्वों के प्रवेश और उनकी किसी करतूत से आग लगने की आशंका जताई गई है। मामले की विस्तृत जांच के लिए शुक्रवार को मंडल रेल प्रबंधक की ओर से ज्वाइंट कमेटी का गठन किया जाएगा। वहीं, अगलगी में चार करोड़ की चपत लगने के बावजूद रेलवे महकमे की नींद नहीं खुली है। क्षतिग्रस्त बाउंड्री की मरम्मत का काम अब तक शुरू नहीं कराया गया है।
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आधिकारिक सूत्रों की मानें तो गोदाम परिसर की बाउंड्री का एक हिस्सा कई दिनों से क्षतिग्रस्त पड़ा है। इस रास्ते अराजकतत्वों के गोदाम परिसर में आने-जाने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं लेकिन सिगनल और कंस्ट्रक्शन विभाग के बीच खींचतान से इसकी मरम्मत का मामला लटक गया। अब भी इसके निर्माण की जिम्मेदारी दोनों अनुभाग एक-दूसरे पर थोपते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि मंगलवार की रात गोदाम में लगी भीषण आग के चलते करीब चार करोड़ रुपए मूल्य के सिग्नल वायर और पाइप समेत अन्य सामान राख हो गए। जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि अभी संयुक्त जांच कमेटी का गठन नही हो सका है। डीआरएम एसके झा शुक्रवार को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ज्वाइंट कमेटी का गठन करेंगे।
सिटी रेलवे स्टेशन की सुरक्षा राम भरोसे
सिगनल गोदाम में आग लगने की घटना के बाद भी रेलवे महकमे ने कहीं कोई संजीदगी नहीं दिखाई। गोदाम के साथ ही सिटी रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पहले जैसी ही है। स्टेशन उस पार रहने वाले लोग बिना रोक-टोक गोदाम, स्टेशन परिसर और रेलवे लाइन तक आते-जाते रहते हैं। सुरक्षा के नाम पर इक्का-दुक्का चौकीदार तैनात हैं। जबकि, सिटी रेलवे स्टेशन परिसर में आरपीएफ का थाना और जीआरपी चौकी है। आरपीएफ इंस्पेक्टर संजय कुमार का कहना है कि यदि डीआरएम का निर्देश मिलता है तो मामले की जांच की जाएगी। वहीं जीआरपी का कहना है कि रेलवे की संपत्ति के सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ के पास है। सिटी रेलवे स्टेशन से रोजाना दर्जनों रेल गाडि़यां गुजरती हैं। हजारों यात्रियों का आवागमन लगा रहता है। बावजूद इसके सुरक्षा के लिहाज से डीएफएमडी (डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर) तक नहीं लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता नहीं की गई तो किसी दिन बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
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