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चावल भंडारण का संकट गहराया

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ज्ञानपुर। भदोही स्थित एफसीआई का हरियांव डिपो फुल हो जाने से जिले में चावल भंडारण की समस्या गंभीर हो गई है। पिछले पांच दिनों से करीब 250 टन चावल लदे 50 से अधिक ट्रक डिपो के बाहर खुले आसमान के नीचे खड़े हैं। यदि मौसम का रुख बदला और बारिश हो गई तो भारी नुकसान हो सकता है। जिला जिला प्रशासन ने केंद्रीय भंडारण निगम के बभनौटी स्थित 5000 एमटी क्षमता के गोदाम को लेने की कवायद शुरू की थी, जिसमें सफलता नहीं मिली। ऐसे में मिलों में पड़े हजारों मीट्रिक टन चावल की उठान बाधित हो गई है, जिसके चलते धन खरीद पर भी असर पड़ रहा है।
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हरियांव डिपो की क्षमता 7500 मीटिक टन है, जो पूरी तरह से भर गया है। चावल भंडारण का संकट गहराने से इसका असर चावल मिलों से लेकर धन क्रय केंद्रों तक पड़ रहा है। मिलों में हजारों टन चावल पड़ा हुआ है। धान की दराई के लिए चयनित 21 राइस मिलों में इस सीजन में अभी तक 20298.68 एमटी चावल तैयार हुआ है जबकि उठान केवल 8557 एमटी चावल की हो सकी है। 11 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा चावल मिलों में पड़ा हुआ है। इसके चलते मिलों ने धान क्रय केंद्रों से धान की उठान रोक दी है। इसका असर यह पड़ रहा है कि धान क्रय केंद्रों पर भी जगह नहीं बची है। यहां भारी मात्रा में धान इकट्ठा हो गया है, जिससे धान की खरीद बाधित होने लगी है। जिले में इस वर्ष धान खरीद का लक्ष्य 53900 मीट्रिक टन तय किया गया था। इसके सापेक्ष अब तक 4701 किसानों किसानों से 31322.719 मीट्रिक टन यानी 58.113 फीसदी धान की खरीद हुई है। करीब 42 फीसदी धान की खरीद अभी बाकी है। क्रय केंद्रों पर किसान धान लेकर पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हें लौटा दिया जा रहा है। किसानों को बताया जा रहा है कि राइस मिलें धान की उठान नहीं कर रहीं, जिसके चलते उनके यहां जगह नहीं बची। ऐसे में वे धान खरीदने में असमर्थ हैं।
जिले में धान खरीद का लक्ष्य पूरा होने के बाद 36113 मीट्रिक चावल की आवक होगी जबकि एफसीआई के हरियांव डिपो की क्षमता केवल 7500 मीट्रिक टन है, जो फुल हो चुका है। इस संकट को देखते हुए प्रशासन ने केंद्रीय भंडारण निगम के बभनौटी डिपो को हासिल करने का प्रयास शुरू किया था लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। यह डिपो वर्ष 2011 से केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त इलाहाबाद के कब्जे में है। डिपो में मात्र 100 एमटी सड़ा-गला सामान रखा गया है। केंद्रीय भंडारण निगम भी कई वर्षों से इस डिपो को कब्जामुक्त करा कराने का प्रयास करता रहा है लेकिन वह सफल नहीं हो सका। शनिवार को जिलाधिकारी विशाख जी ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क, आयुक्त को पत्र लिख कर डिपो मुहैया कराने का आग्रह किया है। इसके बाद भी बात नहीं बनीं तो जिला प्रशासन हजारों मीट्रिक टन चावल का सुरक्षित भंडारण कहां करेगा, इसकी कोई व्यवस्था नहीं दिख रही।
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