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आत्मा को छू जाती थी अप्पा जी की आवाज

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वाराणसी। बॉलीवुड गायक रूप कुमार राठौर का कहना है कि अप्पा जी से व्यक्तिगत तौर पर मिलने का कभी सौभाग्य नहीं मिला लेकिन जब भी वह मुंबई में कार्यक्रम के लिए आती थीं हम लोग उनके कार्यक्रम सुनने जरूर जाते थे। उनके कार्यक्रम देखकर लगता था कि ऐसे लोग तो युगों में एक ही होते हैं। उनके गायन को सुनकर खुदा का अहसास होता था। इस उम्र में ऐसा गाना और प्रशंसकों की लंबी फेहरिस्त बहुत कम नसीब वालों को मिलती हैं। जब वह तान छेड़ती थीं तो उनके सुरों का जादू आत्मा को छू जाता था। मेरी बेटी भी उनकी बहुत बड़ी फैन है। उनके गीतों को सुनकर भावुक हो उठती थी। अप्पा जी कहती थीं कि शर्म औरत का गहना होती है और वह इस बात को अपने गायन में भी तरजीह देती थीं।
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ठुमरी साम्राज्ञी पद्मविभूषण गिरिजा देवी को सुरों की श्रद्धांजलि देना मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है। संगीत के मक्का मदीना काशी में जब भी परफार्म करने का मौका मिलता है तो वह अद्भुत होता है। अस्सी घाट पर 24 मार्च को ठुमरी साम्राज्ञी को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित द लीजेंड्स लाइव मेगा आयोजन में मैं अपनी बेटी रिवा राठौर के साथ मंच साझा करूंगा। रूप कुमार राठौर ने बातचीत के दौरान बताया कि ठुमरी साम्राज्ञी को सुरों की श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित कार्यक्रम को भव्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मालिनी अवस्थी के साथ भी इस पर बात हुई है कि हम लोग अप्पा जी को कैसे अपने श्रद्धा सुमन अर्पित कर सकें। यहां मैंने शांता प्रसाद जी, किशन महाराज, बिस्मिल्लाह खान, रविशंकर जी को देखा है। तबले की परंपरा जो बनारस की है वह अकल्पनीय है। वह कहते हैं कि जब भी बनारस आता हूं तो एक अलग ही अहसास होता है। हर तरफ संगीत, गलियों में चौराहों पर संगीत ही संगीत बसता है। सुनाली राठौर के साथ हमने काशी विश्वनाथ मंदिर में ही विवाह किया था इसलिए बनारस तो हमारा दिल का रिश्ता है।
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