वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय विभाग की ओर से आयोजित पूर्वाचार्य संगीत समारोह का तीसरा दिन पं. मोहन कृष्ण को समर्पित रहा। शुक्रवार को संगीत समारोह की शुरुआत रचा प्रभु तूने यह ब्रह्मांड सारा... से हुई। इसके उपरांत वायलिन एवं बांसुरी के युगल वादन से संगीत के रसिकों को कलाकारों ने मंत्रमुग्ध किया। शारदा प्रसन्न दास एवं हरि प्रसाद पौडवाल ने राग शुद्ध सारंग से धुनों का जादू बिखेरा। मिश्र पीलू में वायलिन व बांसुरी की संगत ने तो समां बांध दिया।
तबला वादन में प्रो. प्रवीण उद्धव एवं श्रुति शील उद्धव ने तीन ताल में दिल्ली घराने के पेशकार से शुरुआत की। वादन की शृंखला को आगे बढ़ाते हुए अजराड़ा घराने के कायदे, रेला, चलन तथा द्रुत ताल में फर्रुखाबाद घराने के गीतों की मनोहारी सांगीतिक प्रस्तुति की। हारमोनियम पर पंकज शर्मा और गायन पर ऋषभ चतुर्वेदी ने संगत की। शंकरवीणा पर विदुषी कमला शंकर ने राग श्री की अवतारणा की। अंत में भटियाली धुन से उन्होंने समापन किया।
राजश्री शिरके की कथक प्रस्तुति संगीत समारोह का आकर्षण रही। तबले पर पं. भोलानाथ मिश्र, हारमोनियम पर पंकज शर्मा और गायन में विदिशा हाजरा ने सहयोग किया। कार्यक्रम का संचालन ज्योति सिंह ने किया। इसके पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. राजेश शाह, प्रो. संगीता पंडित, प्रो. प्रवीण उद्धव, डॉ. सुप्रिया शाह, डॉ. रामशंकर ने त्रिमूर्तियों पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। पं. मोहन कृष्ण के व्यक्तित्व और कृतित्व पर श्वेता चौधरी ने जानकारी दी।