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प्रतिमा नाटकम ने पार किया मील का पत्थर

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वाराणसी। संस्कृत के महाकवि भास के 13 में से 10 नाटकों का सफलतापूर्वक निर्देशन और मंचन कर चुके भूमिकेश्वर सिंह और उनकी टीम ने नागरी नाटक मंडली में शनिवार को एक और मील का पत्थर पार किया। काशी में प्रतिमा नाटकम का मंचन हर किसी को लुभा गया। छाऊ नृत्य शैली के विविध कलाओं से सजे नाटक दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखा। महाकवि भास की रचना रामायण पर आधारित प्रसंगों के अलावा कई नवीन प्रसंगों का समावेश किया गया है।
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नाटक के कथानक में श्रीराम के राज्याभिषेक के समय भरत की अनुपस्थिति, मृत्यु शैया पर पड़े दशरथ के सामने उनके स्वर्ग से आए पूर्वजों का दृश्य, ननिहाल से लौटते वक्त राज्य की सीमा के बाहर ही पूर्वजों की प्रतिमा श्रृंखला के साथ दशरथ की प्रतिमा देखना, सीता हरण के प्रसंग में भारत का कैकई को कोसना और भगवान राम का अयोध्या से बाहर राज्याभिषेक होना आमतौर पर प्रचलित रामायण के प्रसंगों से अलग दिखे। रौद्री सिंह ने अवदातिका, रावण और मंथरा, आकाश शर्मा ने राम, महाराज दिलीप और नागरिक, दिव्यांशु ममगई लक्ष्मण, महाराज आज और नागरिक की भूमिका में थे। नाटक के निर्देशक भूमिकेश्वर सिंह स्वयं महाराज दशरथ की भूमिका में दिखे।
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