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अधिवक्ताओं की जायज मांगें पूरी होनी चाहिए

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ज्ञानपुर। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन की ओर से दीवानी न्यायालय परिसर में दो दिवसीय पूर्वांचल अधिवक्ता सम्मेलन का समापन शनिवार को हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा ने कहा कि देश को आजाद कराने में अधिवक्ताओं की अहम भूमिका रही है। अधिवक्ता समाज के सजग प्रहरी हैं। इसलिए आपकी सभी जायज मांगें पूरी होनी चाहिए।
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बतौर विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा ने कहा कि अधिवक्ताओं की स्वतंत्र राजस्व न्यायालय और उसमें विधि स्नातकों की नियुक्ति की मांग पूरी तरह जायज है। क्योंकि प्राय: देखा जाता है कि राजस्व अधिकारी जो आदेश देता है, उसमें विधिक ज्ञान का अभाव होता है।
बार के अध्यक्ष अश्वनी मिश्र ने अतिथियों का स्वागत करने के बाद मांगों का प्रस्ताव रखा। कहा कि भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक परिवेश में न्याय, न्यायालय, न्यायाधीश, वादकारी और अधिवक्ता की विधि सम्मत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का चयन जनपद न्यायालयों में किया जाए। उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं की भांति निचली अदालतों के अधिवक्ताओं को भी सुविधाएं प्रदान किया जाए। विधि आयोग की तरह कोर्ट फीस संशोधन आयोग का गठन किया जाए और उसमें अधिवक्ताओं की सहभागिता सुनिश्चित कराई जाए।
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अध्यक्ष ने कहा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति में जिला कचहरी के अधिवक्ताओं की सहभागिता का प्रावधान होना चाहिए। न्यायालयों के अवमानना से संबंधित कानून में सुधार कर न्यायिक निर्णयों की आलोचनात्मक व्यवस्था की जाए। स्वतंत्र राजस्व न्यायालयों की व्यवस्था की जाए और उनमें विधि स्नातकों की नियुक्ति होनी चाहिए। इस मौके पर हाईकोर्ट के अधिवक्ता विकास चंद्र त्रिपाठी, तेज बहादुर यादव, रमाशंकर, दीपक कुमार रावत, सुरेश चंद्र मिश्र, सुभाष चंद्र उपाध्याय, सिद्धार्थ कुमार मिश्र, पंकज कुमार त्रिपाठी, ललित कुमार मिश्र आदि रहे।
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