वाराणसी। वरुणा किनारे भीमनगर में करोड़ों की सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़ा कर कब्जा करने वालों से प्रशासनिक अधिकारी तीन महीने में जुर्माना तक नहीं वसूल सके हैं। एक के बाद एक नोटिस भेज कर उसका जवाब फाइलों में रख लिया जाता है। मिट्टी खनन को लेकर नगर निगम और तहसीलों से रिपोर्ट मांगी गई है लेकिन कार्रवाई नहीं हो पाई। एडीएम प्रशासन एमएन उपाध्याय कहते हैं कि निकाय चुनाव में व्यस्तता की वजह से कार्रवाई में देर हुई है। जिला खनन अधिकारी से जल्द ही प्रगति रिपोर्ट मांगी जाएगी।
सेंट्रल जेल रोड स्थित सिकरौल निवासी अजय मौर्या ने कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण से शिकायत की थी कि वरुणा गार्डेन के सामने वरुणा नदी के किनारे आराजी नंबर 973/3 पर नगर निगम के सहयोग से कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। जांच में पाया गया कि जमीन के कुछ भाग पर आसरा योजना के तहत भवन निर्माण चल रहा और एक हिस्से पर होमगार्ड कमांडेंट का कार्यालय बनना है। रकबा 0.302 हेक्टेयर भूमि (करीब डेढ़ बीघा) पर होटल कारोबारी हीरालाल जायसवाल के कब्जे में है।
जांच में पता चला कि विनिमय आदेश के तहत जमीन हीरालाल जायसवाल को दी गई। डीएम योगेश्वर राम मिश्र के निर्देश अवैध तरीके से विनिमय के आदेश को रद्द कर दिया गया लेकिन इसमें अफसरों के खेल के कारण वरुणा की तलहटी को पाटने के मामले में खनन विभाग तीन नोटिस भेजा चुका है। मिट्टी के अवैध खनन और हिरत पट्टी को नुकसान पहुंचान के लिए सात लाख दो सौ रुपये जुर्माना लगाया गया था।