वाराणसी। पिछले सालों की तरह इस बार 35वें साल भी आठवें इमाम अली रजा की शहादत की पूर्व संध्या पर ख्वातीन ने मजलिस का आयोजन किया। शिया मस्जिद कालीमहल, इमामबड़ा स्व. हाशिम हुसैन रिजवी पर डॉ. नुजहत फरमान के संयोजन में कदीमी मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस का आगाज फरहा खान मुंबई ने पवित्र कुरान की तिलावत से किया। इसके बाद नौशीन फातमा बनारस, इलाहाबाद से मैरीन फातमा, कनीज फातमा ने इमाम की शान में मरसिया पेश किया। बुतुल फातमा ने कलाम पेश किया।
मजलिस को खिताब करते हुए डॉ. मिनहाज फातमा नजफी ने इमाम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आठवें इमाम अली रजा ने अपने जीवन में इल्म हासिल किया, सच बोल। यह बताया कि ईश्वर की इबादत करना जिंदगी का मकसद है। मजलिस के समाप्त होने पर इमाम का अंगूरों वाला ताबूत उठाया गया। हजारों औरतों ने हाय इमामे रजा की सदा बुलंद करके नौहा मातम किया। इस अवसर पर पहला नौहा भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की बड़ी बेटी जरीना बानो ने पेश किया। अंजुमन हैदरी निस्वा की ओर से कैशर फातमा, मेहनाज फातमा, इमरोज फातमा, फहमिदा नकवी, शमीमा रिजवी आदि ने दर्द भरे नौहें पेश किया। संयोजिका डॉ. नुजहत फरमान ने बताया कि 1236 साल पहले इमाम अली रजा को धोखे से अंगूरों में जहर मिलाकर शहीद किया गया था। उसी याद में अंगूरों वाला ताबूत उठाया जाता है। ताबूत में शिरकत करने के लिए शहर के अलावा, पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से औरतों ने शिरकत किया। नौशीन सलमान ने लोगों का शुक्रिया अदा किया।