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कथक नृत्य पर तबले-घुंघरू की नोकझोंक से गूंजा अस्सी घाट

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वाराणसी। कथक नृत्य गुरु पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज की मौजूदगी में गुरुवार की रात अस्सी घाट पर दो दिवसीय कथक नृत्य महोत्सव आरंभ हो गया। मुंबई से आई पूजा पंत ने जहां पारंपरिक बंदिशों पर कथक की थिरकन से महोत्सव को यादगार बनाया, वहीं केका सिन्हा और उनकी शिष्याओं सोमांगका भट्टाचार्या, श्वेता पडवाल ने नृत्य शैली में नए प्रयोगों से संगीत प्रेमियों को रससिक्त कर दिया। यह नृत्य महोत्सव नटराज संगीत अकादमी की ओर से आयोजित किया गया है।
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पं. बिरजू महाराज ने मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, नृत्यांगना शाश्वती सेन के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर नृत्य महोत्सव का शुभारंभ किया। सबसे पहले मंच पर उतरीं नटराज संगीत अकादमी की छात्राएं। श्रेयादिता, ऋषिका सिंह, जाह्नवी सिंह, हंसा, विपाशा ने अर्धांग की प्रस्तुति की। इनके बाद रीति वर्मा, कृतिका, कनक और पीहू ने गुरु नमन पर नृत्य के भावों को यादगार बनाया। सीमा तिवारी, अनुपमा, शिखा उपाध्याय, मैथिली सेठ और दित्या ने कृष्ण के पदों पर मोहक नृत्य प्रस्तुति की। तबले पर कुशाल कृष्ण, गायन पर आनंद किशोर मिश्र ने संगत की। निर्देशन संगीता सिन्हा का था। इनके बाद पूजा पंत ने तीन ताल में आमद, तोड़ी, उठान, गत, फर्द के बाद टुकड़ा और चक्करदार की बेजोड़ प्रस्तुति की। तबले पर विवेक मिश्र, गायन में पुष्कराज भागवत और सितार पर पं. ध्रुवनाथ मिश्र ने संगत की। अंत में मुंबई से आईं केका सिन्हा और उनकी शिष्याओं सोमांगका, श्वेता ने समूह नृत्य की प्रस्तुति की। तबले पर कालीनाथ मिश्र, गायन में वैभव मांडकर, पखावज पर सत्यप्रकाश मिश्र ने संगत की।
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