वाराणसी। करवाचौथ के उपलक्ष्य में बुधवार को लंका स्थित रेस्टूरेंट में काशी प्रबुद्ध महिला मंच की सदस्यों ने ‘करवा संग शारदोत्सव के रंग’ कार्यक्रम के जरिये करवा की कहानी और उसकी परंपरा संस्कृति से रूबरू हुईं। सदस्यों ने एक दूसरे को करवाचौथ के महत्व के बारे में बताया, करवा के इतिहास और उसकी कहानियों के मर्म को समझाया। लाल परिधानों में सज-संवर कर पहुंची सदस्याें ने यहां डांडिया रास के साथ जमकर मस्ती भी की।
अध्यक्ष अंजलि अग्रवाल ने बताया कि करवाचौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सुहागिनें रहती हैं। पति की दीर्घायु के लिए रखे जाने वाले इस व्रत के पीछे कई कहानियां हैं। मान्यता है कि करवा नाम की एक महिला ने पति के व्रत रखा था। चांद को अर्घ्य देकर उसे व्रत तोड़ना था। उसके सात भाई थे जो कि उससे बहुत स्नेह करते थे। चांद न निकलने की वजह से जब बहन व्रत से व्याकुल हुई तो उन्होंने पेड़ की ओट में एक दीपक जलाकर रख दिया और बहन से कहा कि चांद निकल आया है। जैसे करवा ने चांद को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ा, उसके पति की मृत्यु हो गई। बाद में उसने बारह महीने तक प्रत्येक चतुर्थी को व्रत रखा तो करवा चौथ के दिन उसकी तपस्या से उसका पति पुन: जीवित हो गया। इस अवसर पर तीन जरुरतमंद सुहागिन महिलाओं को साड़ी व सुहाग की सामग्री वितरित की गई। संचालन छवि अग्रवाल व संगीता अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम में डॉ. रूपाली, अंशिका, रेनू कैला, प्रीतिमा, डॉ. अदिति, डॉ पूनम, अंजू गुप्ता, पूजा, ममता आदि मौजूद रहीं।