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भगवान-भक्त के रिश्ते पर चढ़ेगा प्रेम का रंग

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वाराणसी। काशी में भगवान और भक्तों के बीच अनूठे प्रेम का रंग शनिवार को गाढ़ा हो जाएगा। भक्तों के प्रेम में ही अत्यधिक स्नान से बीमार भगवान जगन्नाथ 24 जून की सुबह परवल के जूस का भोग अर्पित करने के बाद स्वस्थ हो जाएंगे। इसी के साथ पखवारे भर बाद जहां जगन्नाथ मंदिर के पट खुलेंगे, वहीं शाम चार ढोल, मृदंग के साथ उत्सव शुरू हो जाएगी। भगवान की डोली के दर्शन लिए काशीवासी उमड़ पड़ेंगे। अस्सी से डोली पर सवार होकर भगवान बलभद्र और सुभद्रा के साथ सैर-सपाटे पर रथयात्रा पहुंचेंगे। 25 जून से तीन दिवसीय रथयात्रा का मेला आरंभ हो जाएगा।
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अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में शनिवार की सुबह छह बजे पुजारी राधेश्याम पांडेय मंगला आरती के साथ गर्भगृह के पट खुल जाएंगे। भगवान बलभद्र, सुभद्रा और बाबा जगन्नाथ श्वेत वस्त्रों में दर्शन देंगे। केशरयुक्त चंदन, इत्र से पूजा की जाएगी। कपूर, धूपबत्ती और घी के दीयों से आरती उतारी जाएगी। पांच आचार्यों ने विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया। मध्याह्न 12 से तीन बजे तक पट बंद रहे। शाम चार बजे जगन्नाथ मंदिर से भगवान को सपरिवार सुसज्जित डोली पर सवार कराया गया। नाथों के नाथ बाबा जगन्नाथ स्वस्थ होकर तीन दिन के सैर-सपाटे पर निकलेंगे। दुर्गाकुंड, नवाबगंज, कश्मीरीगंज, खोजवां, शंकुलधारा, बैजनत्था होते हुए शाम करीब पांच बजे भगवान की डोली रथयात्रा स्थित बेनीराम के बगीचे में पहुंचेगी। इसके बाद यूनियन बैंक के सामने रथ की पूजा की जाएगी। रात करीब 12 बजे के बाद भगवान के विग्रहों को 14 पहियों वाले 20 फीट चौड़े और 18 फीट लंबे रथ पर विराजित कराया जाएगा।
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