- ट्रॉमा सेंटर स्थित स्थापना स्थल पर वंदेमातरम गान के साथ पूरा हुआ संचलन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बीएचयू के स्थापना दिवस पर आरएसएस के 700 स्वयंसेवकों ने पांच किलोमीटर लंबा पथ संचलन किया। हाथ में लाठी लिए सभी गणवेशधारी कृषि विज्ञान संस्थान के मैदान से सिंह द्वार पहुंचे। महामना की प्रतिमा से रविदास गेट, वहां से यू टर्न लेकर वापस लंका और फिर ट्रॉमा सेंटर स्थित स्थापना स्थल तक पहुंचे। वहां पर वंदेमातरम के साथ पथ संचलन का समापन हुआ। बैंड और पारंपरिक धुन के साथ स्वयंसेवकों की टोली आगे बढ़ती रही। भारत माता, महामना, आरएसएस संस्थापक डॉ. बलिराम हेडगेवार और गुरु गोलवलकर की तस्वीर लगाए फूलों से सजी जीप पर आगे-आगे चल रही थी। इससे पहले कृषि विज्ञान मैदान में अमृत वचन आशीष चोकसे और एकल गीत नंदा राय ने प्रस्तुत किया।
महाकुंभ में दिखती है भारतीय समाज की समरसता
पथ संचलन से पूर्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह व मुख्य वक्ता डॉ. वीरेंद्र जायसवाल ने कहा कि भारतीय समाज समरसता पर आधारित रहा है, जाति व्यवस्था पर नहीं। महाकुंभ के आयोजन में हम इसका प्रत्यक्ष दर्शन कर सकते हैं। 1860 के कालखंड में महामना, स्वामी विवेकानंद, डॉ. हेडगेवार जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया l ये सभी इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि भारत को स्वतंत्रता तो मिल जाएगी, लेकिन अपना तंत्र विकसित न होने पर फिर से भारत पराधीन हो जाएगा। मैकाले के शिक्षा नीति से 1600 शिक्षा केंद्र बंद हो गए। मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. विनोद मिश्र ने बताया कि महामना ने विकसित भारत के निर्माण के लिए इस विश्वविद्यालय की स्थापना की।