वाराणसी। बीएचयू केएन उडप्पा सभागार में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने प्राचीन चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेदिक) से मधुमेह नियंत्रण पर चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि प्रो. आनंद मोहन ने प्राचीन चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाने को जरूरी बताते हुए इस दिशा में एकजुटता के साथ प्रयास करते रहने का आह्वान किया।
जापानी हर्बल (कंपो) चिकित्सा पद्धति और भारतीय चिकित्सा पद्धति पर आयोजित संगोष्ठी में प्रो. आनंद ने कहा कि प्राचीन चिकित्सा पद्धति एवं साहित्य को ध्यान में रखकर विस्तार करना होगा। आयुर्वेद संकाय इस जड़ीबूटी पर कार्य कर वैज्ञानिक रूप दे सकता है। अध्यक्षता करते हुए संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी कहा कि जापानी और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके माध्यम से जापान में आयुर्वेदिक उपयोगिता को बीएचयू के वैद्य बताएंगे। टोकई यूनिवर्सिटी की सेवानिवृत्त प्रोफेसर यसितो कुशाका ने जापानी चिकित्सा पद्धति से मधुमेह नियंत्रण के बारे में बताया। इस दौरान डॉ. संजय मेहरोत्रा, डॉ. आशुतोष पाठक, वैद्य सुशील दूबे, डॉ. नम्रता जोशी, डॉ. सीएस पांडेय, डॉ. केएन सिंह आदि मौजूद रहे।