ज्ञानपुर। शिक्षा विभाग की साठगांठ से जिले में बिना मान्यता के सैकड़ों स्कूल धड़ल्ले से चल रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण शासन की सख्ती का भी इन पर असर नहीं हो रहा। पिछले शिक्षण सत्र में खंड शिक्षा अधिकारियों ने जिन अवैध विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई करने और उन पर ताला बंद कराने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी थी, वहां भी दाखिले और पढ़ाई हो रही है। मतलब यह कि कागज में ये विद्यालय बंद हो चुके हैं लेकिन हकीकत में बेरोकटोक संचालित हो रहे हैं।
जिले में 1113 सरकारी प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा करीब 500 मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। इसके अलावा 225 स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के बजाए कमाई का जरिया बन चुके अवैध स्कूलों का कारोबार दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। गली-मोहल्लों से लेकर चट्टी चौराहे और गांवों में भी दो कमरों में स्कूल चालू हो जा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो भदोही ब्लॉक में 40, ज्ञानपुर में 30, औराई में 80, अभोली में 20, डीघ में 15 और सुरियावां ब्लॉक में 25 से अधिक बिना मान्यता के स्कूल संचालित हो रहे हैं। पिछले वर्ष शासन की सख्ती के बाद शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ अभियान चलाया था। इसकी कमान खंड शिक्षा अधिकारियों को सौंपी गई थी। जांच के बाद खंड शिक्षा अधिकारियों ने दर्जनों स्कूलों में ताला बंद कराने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी थी। अब सवाल यह है कि जिन विद्यालयों को बंद कराने का दावा बीईओ की रिपोर्ट में किया गया, वही विद्यालय कैसे संचालित हो रहे हैं। यहां दाखिला भी हो रहा है और कक्षाएं भी चल रही हैं। सच यह है कि स्कूल बंद कराए बिना झूठी रिपोर्ट भेज दी गई थी। विभागीय अधिकारियों और शिक्षा माफिया की सांठगांठ से कागज में तो स्कूल बंद हो गए लेकिन हकीकत में चल रहे हैं। ऐसे विद्यालयों के संचालन से परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या भी नहीं बढ़ रही है। हर साल सत्र शुरू होने से पूर्व फर्जी स्कूलों को नोटिस जारी कर बंद करने का अल्टीमेटम तो दिया जाता है लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है।