भदोही। सक्तेषगढ़ आश्रम के संत स्वामी अड़गड़ानंद ने कहा कि धर्म नष्ट होने वाली वस्तु नहीं है। कोई भी धर्म गलत नहीं सिखाता। इसलिए सभी धर्मों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। यह समाज और राष्ट्र के हित में है। गीता का अध्ययन हर मनुष्य को करना चाहिए। गीता के उपदेशों से महापापी की भी नैया पार हो जाएगी। गुरुवार को पिपरिस के बरखंडी आश्रम में संत का प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
स्वामी जी ने कहा कि धर्म का पालन करना वास्तविक जीवन पद्धति है। हर व्यक्ति में गुण होते हैं। किसी में अवगुण तलाशने से अच्छा है, उसके गुणों को ढूंढो। किसी व्यक्ति में गुण ढूंढ लेने से ज्ञान का आदान-प्रदान होने लगेगा, जो दोनों के लिए अच्छा है। लोगों को आध्यात्म की ओर ले जाते हुए कहा कि सकारात्मक जीवन से सबका भला होगा। सभी के उन्नति के रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि परमात्मा एक है और सभी को उसका ध्यान करना चाहिए। इससे मन से अवगुण निकल जाते हैं और भगवान साक्षात्कार हो जाता है। भगवान को ढूंढना है तो श्रद्धा से प्रेम करो। प्रेम रूपी स्तंभ की नींव मजबूत करो। शब्द बिन सब अंधा है। वाणी से निकले शब्दों पर ध्यान रखना चाहिए।
इसके पूर्व 12.30 बजे आश्रम पहुंचे स्वामी अड़गड़ानंद का श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। करीब तीन घंटे तक उनका प्रवचन चला, जिस दौरान पूरा आश्रम खचाखच भरा रहा। इस दौरान पूर्व विधायक जाहिद बेग, त्रिवेणी यादव, रमेशचंद्र यादव, मुन्ना यादव, नागेंद्र यादव, श्याम नरायण यादव, पन्नालाल यादव, जयप्रकाश यादव, शोभनाथ यादव, राजकुमार यादव, बड़कू सिंह, राजेश यादव, सूरज यादव आदि मौजूद थे।