वाराणसी। गुरु रविदास के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए मंगलवार को सीर गोवर्धन में अनुयायियों का रेला झूमकर निकला। भजन-कीर्तन करतीं संगतें निकलीं तो सीर की सड़कों पर जात-पात के भेद मिट गए। आस्था का महासागर हिलारें मारने लगा। रंगबिरंगी लतरों और दीपों से जगमग संत की जन्मस्थली पर पूजन-अर्चन के बाद अनुयायी लंका स्थित रविदास पार्क पहुंचे। पार्क से लेकर रविदास घाट की सीढि़यों तक दीपदान किया। कतारबद्ध दीपों की लडि़यां जगमग हुईं तो रविदास पार्क रोशनी से नहा उठा।
संत के संदेशों के प्रतीक रूप में यहां दीप जलाने के लिए हजारों रैदासी पहुंचे। लंका से लेकर रविदास पार्क तक सड़क रैदासियों से पटी थी। दीपदान के बाद संगत वापस सीर लौट गई। जयंती समारोह का मुख्य आयोजन माघी पूर्णिमा पर बुधवार यानी 31 जनवरी को होगा।
संत रविदास के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए उमड़े सैलाब ने सीर गोवर्धन गांव में कुंभ का रूप ले लिया है। मंगलवार को कहीं अटूट लंगर की पांत लगी रही तो कहीं भजनों की टोलियों के झांझ, मजीरे बजते रहे। लाल, नीली, पीली पगड़ी में पंजाब भी था और अपनी पारंपरिक वेशभूषा में राजस्थानी झलक भी। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से लेकर कर्नाटक, महाराष्ट्र, जम्मू, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार की संस्कृतियों का मिलन शिविरों में एक साथ हो रहा था। सड़कों की पटरियों पर खिलौने भी सजाए गए और खेतों में झूले, चर्खियों पर बच्चों, युवाओं की मस्ती भी देखते बन रही थी। डेरा सच्चखंड बल्लां, जालंधर के गद्दीनशीन संत निरजंन दास ने पूरे मेला क्षेत्र का निरीक्षण करके तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान दोनों तरफ श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए कतारबद्ध खड़े थे। संत की जन्मस्थली पर लघु भारत जैसा नजारा दिखा। यहां उत्तर से लेकर दक्षिण, पूरब, पश्चिम के साथ अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, स्विट्जरलैंड, दुबई, आस्ट्रेलिया समेत कई देशों से एनआरआई श्रद्धालु आए हैं। अलग-अलग राज्यों के टेंट लगाए गए हैं, जहां श्रद्धालुओं को ठहराया गया है। सुविधा और सुरक्षा के लिए सेवादारों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच आदि के लिए भी शिविर लगाए गए हैं।