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Varanasi News: 52 नाले और डेढ़ महीने का समय, कागजों में फंसी सफाई

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मड़या में कूड़ा भरने से जाम हुआ नाला। संवाद
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आजमगढ़। मानसून की शुरूआत 15 जून से मानी जाती है। इसके पहले शहर के छोटे- बड़े नालों की सफाई हो जानी चाहिए ताकि, बारिश के समय कहीं जलभराव न हो। मानसून आने को लगभग डेढ़ माह बचे हैं लेकिन नगर पालिका नालों की सफाई को लेकर अभी तक कोई योजना नहीं बना सका है।
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शहर में कुल 52 नाले हैं। इसमें से तीन बड़े, 22 मझोले और 27 छोटे नाले हैं। हर साल इन नालों को 15 जून से पहले साफ सफाई करनी होती है, लेकिन नगर पालिका की उदासीनता के कारण ऐसा हो नहीं पाता है। पिछले साल नालों की सफाई के लिए लगभग 9.50 लाख रुपये जारी किए गए थे। शहर के रहने वाले मनोज गुप्ता, संजय श्रीवास्तव, विशाल उपाध्याय ने बताया कि लचर व्यवस्था के कारण नालों की सफाई जुलाई के प्रथम सप्ताह तक होती रही। हालांकि पिछले वर्ष ज्यादा बारिश नहीं हुई थी जिसके कारण कहीं ज्यादा परेशानी नहींं हुई। इस बार मौसम विज्ञानी अच्छी बारिश की होने की पहले से ही संभावना जता रहे हैं। शहर के प्रमुख और छोटे नाले कूड़ों से पटे हैं। बारिश में जलभराव से निपटने के लिए अभी तक कोई तैयार शुरू नहीं हुई है। हल्की बारिश भी शहर को जलमग्न करने के लिए पर्याप्त होगी। यदि समय रहते युद्ध स्तर पर सफाई नहीं की गई, तो सड़कों के साथ लोगों के घरों में भी पानी भर सकता है।
सिविललाइन क्षेत्र के नालों की स्थित बद्दतर
शहर के सिविललाइन क्षेत्र में लगभग सभी विभागों के कार्यालय और न्यायालय हैं। सिविल लाइन चौराहा से नगर पालिका और पुलिस लाइन जाने वाले मार्ग पर नाले कूड़ों से पटे हुए हैं। डीएवी डिग्री कॉलेज के पास के नाले का भी यही हाल है। दुकानों से निकलने वाला कूड़ा नाले में गिरा दिया गया है।
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नालों पर अतिक्रमण
रैदौपुर, सिधारी, ब्रह्मस्थान आदि जगहों पर पानी निकासी के लिए बने नालों पर गुमटी रखकर अतिक्रमण किया गया है। नाला सफाई में हर साल यह व्यवधान बनते हैं। नगर पालिका की तरफ से इन दुकानदारों पर न तो कोई कार्रवाई की गई और न ही दुकानों को हटाने के लिए नोटिस ही जारी की गई।


वर्जनबरसात से पहले शहर के नालों की सफाई कराई जाएगी। एक सप्ताह में रांची से मजदूर आ जाएंगे। इस बीच टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी। रोस्टर के हिसाब से अतिक्रमण हटाने का काम चलता रहता है। - भूपाल सिंह, अधिशासी अधिकारी।
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