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रंगोली, पेंटिंग, नुक्कड़ नाटक सभी में लोकतंत्र के रंग

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वाराणसी। काशीवासियों को ज्यादा से ज्यादा मतदान और बेहतर सरकार चुनने के लिए रंगोली, पोस्टर और पेंटिंग से भी जागरूक किया गया। नुक्कड़ नाटक और गीतों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने गंगा तटों पर उमड़े जनसमूह को उत्साह से भर दिया। अलग-अलग कॉलेज की टीमें जहां कैनवास पर रंगों और स्कूलों बच्चे प्ले कार्ड्स के जरिए मतदान के लिए प्रेरित कर रही थीं तो इन सबके बीच जैपुरिया स्कूल के सैकड़ों बच्चे केसरिया, सफेद और हरे रंग के यूनिफार्म में आकर्षण का केंद्र बने हुए थे।
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दशाश्वमेध घाट पर नमामि गंगे की टीम ने हर-हर महादेव के नारे के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की। बाद में भातखंडे संगीत विद्यापीठ के बच्चों ने जय हो... और तू मेरा कर्मा तू मेरा धर्मा, तू मेरा अभिमान है... गीत की प्रस्तुति से वहां मौजूद लोगों में जोश भर दिया। स्वर ध्वनि की गूंज के बाद गाइड छात्राओं ने बैंड की आकर्षक प्रस्तुति दी। इसी दौरान मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के कलाकारों ने मतदान गीत गाया तो वहीं अक्षर पाठशाला ऋषिकल्प सोसाइटी के युवाओं ने नुक्कड़ नाटक के जरिए जागरूक किया।
इसी दौरान अस्सी घाट पर बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के प्रमुख प्रो. राजेश शाह के नेतृत्व में अर्पिता भट्टाचार्या की टीम ने ‘हो जाओ तैयार साथियो...’ और ‘देश के हर व्यक्ति को अभिमान होना चाहिए...’ देशभक्ति गीतों से रोमांचित कर दिया। इसमें मोहिनी गांगुली, प्रियंका सहवाल, साक्षी सिन्हा, सविता, सुरभि और मुक्ता ने गायन किया। हारमोनियम पर संगत डॉ. इंद्रदेव चौधरी और तबले पर पंकज राय ने साथ दिया। बीएचयू के दृश्य कला संकाय, काशी विद्यापीठ मुख्य परिसर समेत, डॉ. विभूति नारायण सिंह परिसर गंगापुर और इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के 55 विद्यार्थियों ने ऑन द स्पॉट पेंटिंग में हिस्सा लिया। बीएचयू के डॉ. मनीष अरोरा, डॉ. शशिकांत नाग और सुमित घोष ने इसमें सहयोग किया।
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उधर, अहिल्याबाई घाट पर शास्त्रार्थ महाविद्यालय के वेद पाठी बटुकों ने मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरुआत कराई। इसके उपरांत वेद मंत्रो से श्रद्धालुओं को मतदान के लिए संकल्पित कराया। तदुपरांत भारत माता की जय, वंदेमातरम् का जयघोष करते रहे। बटुकों का नेतृत्व आचार्य पवन शुक्ला एवं आचार्य चूड़ामणि शास्त्री ने किया। कामरूप मठ के उत्तराधिकारी स्वामी जपीश्वरानंद तीर्थ एवं सद्गुणानंद तीर्थ महाराज अपने दंडी संन्यासियों के साथ उपस्थित थे। इसी दौरान घाटों पर शंखनाद और मंत्रोच्चार भी किया गया।
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