वाराणसी। मंदिर में चल रहे ध्वस्तीकरण के कार्य में निकलने वाले पुराने पत्थरों को मंगलवार से दो जगहों पर गोदाम बनाकर रखा जाने लगा। वहीं राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को भी नियुक्त कर दिया गया है। जिनकी देखरेख में यह कार्य किया जाएगा।
25000 वर्ग मीटर में बनने वाले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में कुल 296 मकानों को शामिल किया गया है। वहीं कई जर्जर और अनाधिकृत मकान भी हैं जिन्हें अभी गिराना है। इन मकानों के गिराने का काम भी शुरू हो गया है। इसको देखते हुए डीएम ने सोमवार की शाम को बैठक की। बैठक में उन्होंने मंदिर प्रशासन को इस ध्वस्तीकरण में निकलने वाले पत्थरों को पुरातत्व विभाग से जांच कराने को कहा था। मंगलवार के ध्वस्तीकरण के दौरान निकलने वाले पत्थरों को दो जगहों पर रखा जाने लगा। मंदिर के कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि इसके लिए पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को लगाया गया है। उनकी देखरेख में सारे कार्य किए जाएंगे। इसलिए अब पुराने पत्थरों को एक स्थान पर सुरक्षित रखा जा रहा है।
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कॉरिडोर निर्माण कराने वाली कंपनी का चयन आज
वाराणसी। श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के लिए बुधवार को कंसलटेंट कंपनी नियुक्त कर दी जाएगी। मंदिर कॉरिडोर निर्माण के लिए टेंडर के माध्यम से बुलाई गई कंपनियों में चार ने अपना टेंडर डाला था। इसमें से दो कंपनियां तकनीकी रूप से पास हुईं। इन कंपनियों का प्रजेंटेशन सोमवार को हुआ। लेकिन मानक के अनुसार तीन कंपनियां होनी होनी चाहिए। इसको लेकर मंदिर प्रशासन ने शासन को पत्र लिखकर एक कंपनी को चयनित करने की अनुमति मांगी। अधिकारियों ने बताया कि शासन से बुधवार को अनुमति मिल जाएगा। वहीं बुधवार को ही एक कंपनी को तय भी कर दिया जाएगा।
52 जगहों पर शुरू हुआ ध्वस्तीकाण का कार्य
मंदिर कॉरिडोर का निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए मंदिर प्रशासन दिन रात कार्य करा रहा है। समय कम और कार्य की अधिकता को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने मजदूरों की संख्या बढ़ा दी है। 31 अक्तूबर तक पूरा करने के इस टारगेट को लेकर मंदिर प्रशासन तेजी से काम करा रहा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार मंगलवार से कुल 52 जगहों पर ध्वस्तीकरण और मलवा हटाने का काम शुरू हो गया है।