फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ध्वस्त नजर आए इंतजाम, चौतरफा लगा जाम

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। रोजाना जाम की समस्या से जूझने वाले शहरवासियों को उम्मीद थी कि नवरात्र में देवी मंदिरों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ के मद्देनजर व्यवस्था कुछ इस तरह होगी कि शहर की सड़कों पर जाम से जूझना नहीं पड़ेगा। मगर, नवरात्र की शुरुआत से पहले मंगलवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में ऐसा भीषण जाम लगा कि एक किलोमीटर का सफर तय करने में आधा घंटे से ज्यादा का समय लग गया। इन हालात में आगामी दिनों में जब देवी दुर्गा केे दर्शन-पूजन को श्रद्धालुओं का रेला उमड़ेगा तो शहर की सड़कों पर किन दुश्वारियों से जूझना होगा इसका जायजा आसानी से लगाया जा सकता है।
विज्ञापन

सड़कों व पटरियों पर अतिक्रमण, डग्गामार वाहनों का दबाव, जगह-जगह खुदाई व निर्माण कार्य, जर्जर सड़क, वाहन पार्किंग की व्यवस्था का अभाव और ट्रैफिक पुलिस की लापरवाह कार्यशैली शहर की सड़कों पर राहगीरों के लिए जी का जंजाल बन गई है। मंगलवार को हालात कुछ इस कदर रहे कि मंडुवाडीह चौराहा से चांदपुर चौराहा तक लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय करने में एक घंटे का समय लग गया। कुछ ऐसी ही स्थिति बीएचयू से कैंट रेलवे स्टेशन मार्ग, महमूरगंज से रथयात्रा मार्ग, गोदौलिया से चौक होते हुए मैदागिन मार्ग, लहुराबीर से मैदागिन मार्ग, कचहरी से भोजूबीर मार्ग और हुकुलगंज सेे पांडेयपुर मार्ग की भी रही। इस दौरान वाहनों की कतारों के बीच जगह-जगह स्कूली वाहन और एंबुलेंस फंसी रही लेकिन उन्हें जाम से निकालने के लिए कोई आगे आता नहीं दिखा।
----------
कार्रवाई की तरह समाधान के लिए भी अभियान चलाते
यातायात नियमों के प्रति आमजन गंभीर हों, इसके लिए बीते दिनों पुलिस की ओर से तीन सौ ज्यादा टीमें सड़क पर उतार कर कार्रवाई की गई। मगर, यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कभी ऐसी गंभीरता नहीं दिखी। सोशल मीडिया पर अब मांग उठने लगी है कि तीन सौ से ज्यादा नहीं कम से कम सौ पुलिस टीमें ही सड़क पर उतारी जाती और उनका पूरा ध्यान यातायात व्यवस्था सुधारने पर होता तो सूरत कुछ बदली सी नजर आती।
विज्ञापन

--------
थानों से समन्वय बनाकर करें काम तो बनें बात
ट्रैफिक पुलिस और थानों पर तैनात पुलिस के बीच समन्वय का अभाव यातायात की समस्या के समाधान में एक बड़ी बाधा है। ट्रैफिक पुलिस चौराहों पर खड़ी नजर तो आती है लेकिन जाम की समस्या के समाधान से ज्यादा उनका फोकस चालान काटने पर होता है। वहीं, थानों पर तैनात पुलिसकर्मी जाम की समस्या को ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी मान कर कन्नी काट लेते हैं। सामंजस्य का यह अभाव भी जाम का एक बड़ा कारण है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें