वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार समीक्षा कर निर्देश भले ही जारी कर रही है मगर अफसरशाही के कारण परियोजनाएं रफ्तार नहीं पकड़ पा रही हैं। यह हाल तब है, जब इन परियोजनाओं के लिए बजट का कोई संकट नहीं है और पीएमओ से इसकी लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। हालात कुछ ऐसे हैं कि परियोजनाओं को उनकी तय नई समयसीमा में पूरा करना कड़ी परीक्षा बन गया है।
शहर में चल रही कई परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनके पूरा होने की समयसीमा समाप्त हो चुकी है पर उनका काम अटका हुआ है। काम की रफ्तार देखते हुए आने वाले कुछ महीनों में भी परियोजनाओं का पूरा होना संभव नहीं है। बाबतपुर-कचहरी फोरलेन का काम तेज गति से चल रहा है। इसे पिछले साल सितंबर में पूरा हो जाना था पर इसकी भी समयसीमा बढ़ा दी गई। इस बीच रेलवे कैंसर अस्पताल को टाटा ने तय समयसीमा में पूरा कर मिसाल पेश कर दी है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना है।
शनिवार को लखनऊ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने वाराणसी के विकास कार्र्यों को पूरा करने की समयसीमा तय कर दी है। इसमें वाराणसी में पर्यटन विकास कार्र्यों की रफ्तार बढ़ाने की आवश्यकता जताते हुए 30 जून तक हर हाल में कार्य पूरे कराने को कहा। उन्होंने वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर के आसपास संचालित निर्माण और विकास कार्यों, घाटों पर हो रहे कार्यों के साथ वाराणसी में केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से संचालित कार्य जल्द पूरे कराने के निर्देश दिए।
शाह के इन परियोजनाओं को पूरा करने का निर्देश देने का संकेत साफ है कि परियोजनाओं को समय से पूरा करना अफसरों के प्रभाव की परीक्षा का मानक होने जा रहा है। केंद्र सरकार इस मामले में जिस तरह से सख्त रुख दिखा रही है, उससे जाहिर है कि अब देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है।