वाराणसी। इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसीन तथा सार्क क्रिटिकल केयर सोसइटी की ओर से पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस तथा वर्कशॉप ‘क्रिटीकेयर-2018’ का बुधवार को शुभारंभ हुआ। कैंटोनमेंट स्थित दो होटलों में चले इस कांफ्रेंस में वक्ताओं ने आईसीयू में भर्ती मरीजों के इलाज पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान एम्स दिल्ली के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जीसी खिलनानी को आईएससीसीएम ‘ओरेशन’ से सम्मानित किया गया।
कांफ्रेंस में डॉ. जीसी खिलनानी ने कहा कि आईसीयू में एंटीबायोटिक का वैज्ञानिक, तार्किक और व्यावहारिक उपयोग के द्वारा इलाज में लागत को कम किया जा सकता है। एंटीबायोटिक के गलत या अनुपयुक्त प्रयोग से अन्य दवाएं असर नहीं कर पाती है। जब भी रेजिसटेंट जीवाणुओं से मरीज को इनफेक्शन होता है तब बहुत महंगी एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करना पड़ता है और मरीज के इलाज का खर्च और समय दोनो ही बढ़ जाता है। उधर दूसरे सत्र में बीएचयू टीबी-चेस्ट विभाग के डॉ. जीएन श्रीवास्तव ने कहा कि खांसी को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसमें लापरवाही पर कभी-कभी आईसीयू में भर्ती करना पड़ जाता है। इसके प्रति सावधानी बरतने की जरूरत है। इस दौरान डॉ. कपिल जिरपे, जर्मनी से डॉ. तेबियास वेल्टे, टाटा मुंबई से डॉ. जे दिबतिया, डॉ. सुबल दीक्षित आदि ने अपने विचार रखे। कांफ्रेंस में विदेश से आए 40 चिकित्सकों को उनके उत्कृष्ट चिकित्सकीय सेवा कार्य के लिए डॉ. डीके सिंह ने सम्मानित किया। कांफ्रेंस के प्रथम दिन कुल 20 तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इसमें दो हजार से अधिक चिकित्सक व प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। 80 लेक्चर और 30 शोध पत्र प्रस्तुत हुए। 32 लोगों को फेलो इन क्रिटिकल केयर मेडिसीन की उपाधि प्रदान की गई। इस दौरान डॉ. एपी सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।