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ध्रुपद तीर्थ में गायन-वादन का श्रोताओं ने उठाया आनंद

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वाराणसी। तुलसीघाट पर चल रहे ध्रुपद मेले के चौथी निशा में गायन-वादन की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति हुई। कलाकारों और संगीत साधकों के गायन और वादन का देर रात तक श्रोताओं ने आनंद उठाया। आशुतोष भट्टाचार्य के गायन देवाधिदेव महादेव की शानदार प्रस्तुति से पूरा माहौल भक्तिमय बना दिया। इनके साथ पखावज पर अंकित पारिख एवं तानपुरे पर साथ दिया डॉ मधुचंदा दत्ता ने। आशुतोष ने गायन का आरंभ किया, राग भूपाली में आलाप के साथ चौताल में निबद्ध रचना से की। उन्होंने बानी चारो के व्यवहार गायन से समापन किया।
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ध्रुपद तीर्थ में दूसरी प्रस्तूति रही इटली के वरिष्ठ बादक जियानी रिचिजी की। इन्होंने रुद्रवीणा वादन कर खूब वाहवाही लूटी। इनके साथ भी पखावज पर संगति की अंकित पारिख और तानपुरे पर डॉ. मधुचन्दा दत्ता ने साथ दिया। उन्होंने राग बागेश्री में आलाप के साथ चौताल में निबद्ध ध्रुपद रचना के साथ की।
इसी तरह तीसरी प्रस्तुति पद्मश्री पं उमाकांत गुंदेचा और पं. रमाकांत गुंदेचा की रही। ध्रुपद युगल गायन की तानपुरे पर साथ दिया मुकुंद देव ने पखावज पर संगति रमेश चंद्र जोशी की रही। गुंदेजा बंधुओं के साथ दूसरे तानेपुरे पर संजीव झा ने साथ दिया। राग कलाकारों ने हमीर में अलाप के साथ धमार की प्रस्तुति की। इसके बोल थे छिड़कत अबीर गुलाल...। पखावज वादक द्वय महंत पं अमरनाथ की शिष्य परंपरा में दीक्षित पं. अखिलेश गुंदेचा के शिष्य हैं। इस मौके पर अनंत नारायण सिंह, संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो विश्वंभर नाथ मिश्र, संस्थापक सदस्य संगीतज्ञ प्रो. राजेश्वर आचार्य मौजूद रहे।
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