मधुबन। ओबीसी का होते हुए फर्जी अनुसचित जाति के प्रमाणपत्र के माध्यम से अपने ही ग्राम प्रधान के विरुद्ध एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने वाला एक व्यक्ति अपने ही जाल में फंस गया। पुलिस ने सोमवार को उसे गिरफ्तार कर लिया।
मामला तहसील क्षेत्र के पदारथपुर गांव का है। वर्ष 2014 में राजेश मिश्र उस गांव के ग्राम प्रधान थे। उसी समय उनके गांव का सुरेश गोंड़ पुत्र चतुरी गांव के बंजर जमीन पर कब्जा कर रहा था जिसे ग्राम प्रधान राजेश मिश्र ने रोकवा दिया।बाद में सुरेश ने स्थानीय थाने में अपना अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र लगाकर राजेश मिश्रा के विरुद्ध एससीएसटी के तहत मुकदमा कायम कर दिया। इसके बाद राजेश मिश्रा ने सुरेश के गोंड़ अनुसूचित जनजाति का होने पर ही सवाल खड़ा कर दिया। ग्राम प्रधान ने दलील थी कि इसके पहले सुरेश ने वर्ष 2013 में कहांर जाति जो पिछड़ी जाति में आती है ,के आधार पर गांव में ही 123(1)के तहत पट्टा करा लिया था।इसी को राजेश मिश्रा ने आयोग में चैलेंज किया।आयोग से इसकी जांच कराई गई तो तत्कालीन एसडीएम ने सारे रिकॉर्ड देखने के बाद अपने 20 सितम्बर 2016 की आख्या में लिखा कि इस क्षेत्र में गोंड नही पाए जाते है और गोंड़ हैं, वे कहांर जाति ओबीसी में आते है।इसी के आधार पर 19 नवम्बर 2016 को स्थानीय थाने में धोखाधड़ी आदि धाराओं में सुरेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।इसी के तहत रविवार की रात एसएसआई मनोज कुमार नेआरोपी सुरेश के घर छापा मारकर गिरफ्तार कर लिया और सोमवार को जेल भेज दिया।
गोंड़ ओबीसी में आते हैं जो इस क्षेत्र में हैं इस क्षेत्र में गोंड नहीं हैं जो एससीएसटी में आते हैं। क्षेत्र में ऐसे लोगों के जाति प्रमाण पत्र जांच कराकर निरस्त किए जाएंगे जो तथ्यों को छिपाकर गोंड़ जाति का होते हुए अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र हासिल कर लिए हैं।
निरंकार सिंह -एसडीएम