सेवापुरी। जंसा थाना क्षेत्र के चौखंडी गांव स्थित हनुमान जी के नाम से राजस्व अभिलेख में दर्ज लगभग तीन बीघे भूमि की रजिस्ट्री (टुकड़ों में) तथ्यों को छिपाकर की गई थी। मुंतजिमकारों और बैनामेदारों ने रजिस्ट्री लेखपत्र में भूमि की श्रेणी हनुमान जी की नहीं बल्कि निजी दिखाकर की थी। यही वजह है कि कई लोगों ने अलग-अलग समय में भूमि की रजिस्ट्री तो करा ली, लेकिन जब मामला दाखिल खारिज का आया तो खतौनी में भूमि हनुमान जी के नाम होने से पेंच फंस गया।
हनुमान जी की जमीन आराजी नंबर 838, 839, 854, 947 रकबा 0.7420 हेक्टेयर के मुंतजिमकार बद्रीनारायण, रामेश्वरनाथ, द्वारिकानाथ
भुवनेश्वरनाथ आदि ने वर्ष 2010 में चौखंडी गांव निवासिनी मंजू पत्नी राजेन्द्र प्रजापति को आराजी नंबर 838, 839 से 0.85 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री करते समय रजिस्ट्री लेखपत्र में हनुमान जी की जगह अपनी निजी भूमि बताकर रजिस्ट्री की। किंतु इस भूमि की दाखिल खारिज आज तक नहीं हो सकी। इसकी वजह खतौनी में भूमि हनुमान जी के नाम दर्ज होना है। बता दें कि 1990 में इसी मंजू के पति राजेन्द्र प्रजापति ने खरगूपुर स्थित हनुमान जी की करोड़ों की 26 बिस्वा भूमि का बैनामा दूसरे मुंतजिमकारों से करवा लिया था। इस जमीन के दाखिल खारिज का मामला आज भी नायब तहसीलदार के यहां विचाराधीन है।