वाराणसी। गंगा में तेज बढ़ाव से बुधवार को कई घाटों का आपसी संपर्क टूट गया। मढ़ियों के मंदिर डूब गए। घाटों पर गंगा के पहुंचने के बाद तीर्थ पुरोहितों ने चौकियां हटा लीं। नावें बहने न पाएं, इसलिए लंगर बांधने की मशक्कत शुरू हो गई है। देर शाम दशाश्वमेध घाट और शीतल घाट पर आरती स्थल बदल दिए गए। गंगा सेवा निधि के नेपाली पुरोहितों ने ऊपरी सतह की सीढ़ियों पर गंगा आरती की। श्रद्धालुओं ने सीढ़ियों और छतों से आरती निहारी। देर शाम गंगा के जलस्तर में चार सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ाव से तटवर्ती लोगों की चिंता बढ़ गई है।
सहायक नदियों, पहाड़ी नालों से लगातार आ रही जलराशि से गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ाव हो रहा है। बुधवार शाम 40 से अधिक घाटों का आपसी संपर्क टूट गया। आने-जाने के रास्ते डूब गए। राजेंद्र प्रसाद घाट से मीरघाट के बीच की सीढ़ियों पर पानी आ गया। इससे अब तीर्थयात्रियों, पर्यटकों को मणिकर्णिका घाट और ललिता घाट जाने के लिए गलियों का सहारा लेना पड़ेगा। इसी तरह शीतला घाट पर गंगा हिलोरें मारने लगी हैं। इस घाट से हरिश्चंद्र घाट और अस्सी घाट जाने का संपर्क टूट गया है। शाम 6:30 बजे दशाश्वमेध घाट पर विश्व विख्यात गंगा आरती का स्थल बदल दिया गया। शीतला घाट पर भी आरती स्थल बदल गया। अब इन घाटों पर गंगा आरती ऊपर आ गई।
उधर, ललिता घाट पर शेषशायी भगवान विष्णु का मंदिर डूब गया। किनारे की मढ़ियों के कई प्राचीन मंदिर गंगा में जलमग्न हो गए। केंद्रीय जल आयोग की बुलेटिन के अनुसार शाम सात बजे गंगा का जलस्तर 62. 94 मीटर रिकार्ड किया गया। मां गंगा निषाद राज सेवा समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार निषाद ने बताया कि जल स्तर बढ़ने के साथ ही नावों पर लाइव जैकेट रखना अनिवार्य कर दिया गया है। क्षमता से अधिक सवारियां नावों पर न बैठाने के लिए कहा गया है। घाटों पर सतर्कता बरती जा रही है।