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सुरों की खनक संग बनारसी परिधानों की चमक

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वाराणसी। गजलों की कशिश के साथ बनारसी परिधानों के फैशन का जलवा शनिवार को छा गया। मुंबई के मशहूर गजल गायक जसविंदर सिंह के सुरों पर बनारसी वस्त्रों पर आधारित फैशन डिजाइनर मिती बग्गा के वस्त्रों का अनूठा संग्रह हर किसी को आकर्षित करता रहा। मिती के डिजाइन किए वस्त्रों में सज-धज कर पहुंचे मेहमानों ने फैशन डिजाइनिंग पर आधरित किताब का विमोचन भी किया।
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सनबीम वरुणा के परिसर में निदेशक दीपक मधोक, भारती मधोक ने दीप प्रज्ज्वलन कर शाम-ए-गजल को आगे बढ़ाया। इसी के साथ सुरों की खनक गूंजने लगी और शाम गजलों की कशिश में भीगते लम्हों के साथ आगे बढ़ने लगी। गजल गायक जसविंदर के मंच पर पहुंचने के साथ ही तालियों की बौछार गूंजने लगी। उन्होंने शुरुआत की- यूं तो क्या-क्या नहीं आता...। फिर, दिल को थामा उनका दामन थाम के.../जो किसी पर फिदा नहीं होता..../ दिल को कुछ अपनी खबर न लगे.../आज जाने की जिद न करो मेरे पहलू में बैठे रहो.../ तुमको देखा तो ये ख्याल आया.../ हजारों ख्वाहिशें ऐसी..../ ये दौलत भी ले लो.../ कल चौदहवीं की रात... जैसी गजलों की एक से बढ़कर ए बानगी जसविंदर पेश करते गए। फरमाइशें भी खूब हुईं।
की बोर्ड पर श्रीधर चारी, तबले पर सुशांत शर्मा, गिटार पर हर्षवर्धन ने संगत की संचालन किया प्रतिमा सिन्हा ने।

बनारस के बुनकरों की बेहतरी के लिए काम करें डिजाइनर : मिती बग्गा
आयोजन के दौरान गजल गायक जसविंदर के अलावा दुबई से आईं ओजस्वी राजे के अलावा छह युवक और छह युवतियों ने फैशन डिजाइनर मिती बग्गा के डिजाइन किए गए परिधानों का प्रदर्शन किया। इस मौके पर मिति ने बनारस के बुनकरों की बेहतरी का मुद्दा उठाया। मिती ने कहा कि फैशन की दुनिया की ओर बड़ी तादाद में युवा रुख कर रहे हैं। बॉलीवुड से लेकर अमेरिका, इंगलैंड तक बनारसी साड़ी और यहां के परिधानों की मांग बढ़ी है। ऐसे में फैशन पर काम करने वाले डिजाइनर बनारस के बुनकरों को काम देकर उनकी जिंदगी में बदलाव ला सकते हैं। इसके लिए फैशन डिजाइनरों को आगे आना चाहिए।
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