जैविक खेती के लिए जिले में 36309 किसानों का 1012 समूह तैयार किया गया। एक समूह (कलस्टर) के किसान 20 हेक्टेयर भूमि में मिलकर रसायन मुक्त खेती करने में जुट गए हैं। कृषि विभाग और सात निजी एजेंसी की ओर से परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जिले में 1122 कलस्टर तैयार करने का लक्ष्य था। जिसमें 1012 को तैयार कर लिया गया। एक कलस्टर के निर्माण और प्रशिक्षण एक लाख 90 हजार रुपये डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ) के माध्यम से दिया जाता है।
उप निदेशक अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि बीते तीन साल से नमामि गंगे परियोजना के परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जिले में 1122 कलस्टर तैयार करने का लक्ष्य था। रसायन मुक्त खेती के लिए एक कलस्टर 20 हेक्टेयर का है। इसमें एक एकड़ से एक बिस्वा तक के किसान शामिल हो सकते हैं।
इसके लिए सात एजेंसियों को नामित किया गया था। इनके माध्यम से अब तक 1012 कलस्टर तैयार किया गया। जिसमें 36309 किसान शामिल हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक कलस्टर को डीबीटी के माध्यम में एक लाख 90 हजार की आर्थिक मदद की जाती है। इससे किसान स्प्रे मशीन, ड्रम जैसे जरूरी चीजें खरीदते हैं।
योजना के तहत सर्वाधिक कलस्टर बड़ागाव में 194, सेवापुरी में 165, चिरईगांव में 164, चोलापुर में 151, पिंडरा में 145, आराजीलाइन में 130, हरहुआ में 115 और काशी विद्यापीठ में 48 कलस्टर का निर्माण कराया जा चुका है।