संजोया जाएगा 1700 साल का ‘इतिहास’
- संपूर्णानंद विश्वविद्यालय में रखे हैं सात हजार अवशेष
- इंटैक और संग्रहालयाध्यक्ष ने कुलपति को सौंपा प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के संग्रहालय में कई सौ साल पुरानी कलाकृतियां और धरोहरें रखी हैं। इन्हें संजोने के लिए संग्रहालयाध्यक्ष और इंटैक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज) ने योजना बनाई है, जिसे कुलपति को सौंपा गया है। प्रस्ताव में संग्रहालय को विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में शिफ्ट करने की बात भी शामिल है।
संपूर्णानंद विश्वविद्यालय में स्थित संग्रहालय की स्थापना 6 अक्तूबर 1958 को हुई थी। यहां चौथी शताब्दी से लेकर कम से कम 300 साल (17वीं शताब्दी तक) पुरानी धरोहरें हैं। इसमें प्रतिमाएं, देश में प्रचलित रहे सिक्के, लघु चित्र, पांडुलिपियां, टेराकोटा और आदि मानव के समय के अस्त्र शस्त्र शामिल हैं, जिन्हें सहेजने की तैयारी है। अभी इंटैक विश्वविद्यालय के मुख्य भवन का जीर्णोद्धार करा रहा है।
ये हैं धरोहरें
मुद्राओं में पहला सिक्का आहत मुद्रा, सोने, चांदी, तांबे का सिक्का, गुप्त काल की प्रतिमाओं में अग्नि की प्रतिमा, सूर्य-दुर्गा की प्रतिमा, हरिहर और अर्द्धनारीश्वर के अलावा विष्णु की प्रतिमाएं शामिल हैं। पांडुलिपियों में ताड़ पत्र, गुरुमुखी लिपि भागवत और गंजीफा रखे हुए हैं। टेराकोटा में मौर्य काल, कुषाण काल और गुप्तकाल की मिट्टी की प्रतिमाएं शामिल हैं। आदि मानव की कुल्हाड़ी और शृंगार भंजिका भी संग्रहित हैं।
ये बना है प्लान
मुख्य भवन में दोनों ओर गलियारे बनाए जाएंगे, जिसमें लघुचित्र वीथिका, पांडुलिपि वीथिका, मुद्रा वीथिका, विविध सामग्री वीथिका, मृद भांड वीथिका, लघु प्रहार वीथिका, प्रस्तर वीथिका, संग्रहालय कक्ष, वैदिक कर्मकांड वीथिका, ज्योतिष वीथिका, सोलह संस्कार, तंत्रागम वीथिका, नक्षत्र वाटिका, प्राचीन कृषि वीथिका बनाने की तैयारी है। मुख्य भवन के पीछे की वेधशाला को भी संवारा जाएगा।
कोट
इंटेक के सहयोग से बनी योजना का खाका तैयार कर कुलपति को सौंपा गया है। यह योजना मूर्त रूप लेती है तो विश्वविद्यालय में आय का नया श्रोत बनेगा और धरोहरों का संरक्षण भी होगा।
-डॉ. विमल कुमार त्रिपाठी, संग्रहालयाध्यक्ष