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कला दीर्घा में बिखरी चित्रकला की आभा

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वाराणसी। टेंट सिटी में प्रवेश करते ही बाएं हाथ कला दीर्घा प्रवासी भारतीयों को काशी के दर्शन करा रही है। ये दीर्घा नामी चित्रकारों की कृतियों से सजी है।
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बनारस पर करीब 100 से ज्यादा पेंटिंग शो कर चुके यशवंत शिरवडकर की कई पेंटिंग कला दीर्घा में सजी हैं। काशी के घाटों का सौंदर्य उन्होंने ब्रश से ही नहीं, बल्कि आयल पेंट की 10 परतों के ऊपर चित्रकारी में इस्तेमाल किए जाने वाले चाकू से उकेरा है। गुजरात के चित्रकार हर्शिल पटेल ने मन से जिएं काशी को अपनी अंगुलियों की छाप से निखारा है। देश के शीर्ष दस चित्रकारों में शामिल मनु पारिख ने घाट, मंदिर और भगवान दर्शाए हैं। उनकी इस पेंटिंग की कीमत साढ़े तीन लाख रुपये है। 83 साल के नाटू मिस्त्री ने पानी के रंगों से काशी की भव्यता दिखाई है। कागज पर ब्लेड से बनाई गई गजेंद्र शाह की कृति ने उनकी याद ताजा रखी है। गुजरात के क्यूरेटर चैत्य धनवी शाह ने बताया कि कला दीर्घा में पांच चित्रकारों की 39 पेेंटिंग लगाई गई हैं। मूल कृतियों के अलावा मैन्युअल पेंटिंग को भी इसमें रखा गया है। 12 हजार से लेकर साढ़े तीन लाख की पेंटिंग इसमें शामिल है।
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