नई दिल्ली/वाराणसी। बनारस में बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल सहित देशभर के अस्पतालों में डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ रही हिंसा पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सख्त कदम उठाया है। अब इस तरह की हिंसा पर रोक लगाने के लिए मंत्रालय ने एक अतिरिक्त सचिव की तैनाती कर दी है, जो डॉक्टरों से बातचीत कर रणनीति बनाकर आगे की कार्रवाई करेंगे।
बीएचयू अस्पताल में 24 सितंबर को रेजिडेंट डॉक्टर के साथ मारपीट के बाद 25 से 30 सितंबर तक रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर थे। इसको लेकर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन भी हुए। दिल्ली में डॉक्टरों के राष्ट्रीय संगठन की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास तक कूच भी किया गया लेकिन आवास से पहले ही डॉक्टरों को रोक दिया गया था। इस दौरान आईएमएस बीएचयू के तीन रेजिडेंट डॉक्टर भी दिल्ली जाकर संगठन के पदाधिकारियों से मिलकर न्याय की गुहार लगा चुके थे। अब अतिरिक्त सचिव की तैनाती के बाद मंत्रालय ने रेजिडेंट डॉक्टरों से भी इस बाबत ड्राफ्ट पेश करने को कहा है।
यूनाइटेड आरडीए के को-चेयरमैन और एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हरजीत भट्टी ने बताया कि देशभर में डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ रही हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, आत्महत्या की प्रवृति और मेडिकल की पढ़ाई के निजीकरण के मामले पर बुधवार को तीन सदस्यीय दल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिलने गया था। उनकी मांग है कि इसके खिलाफ सख्त कानून बनाकर उसका पालन हो। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने इन मामलों को देखने के लिए अतिरिक्त सचिव संजीवा कुमार को जिम्मेदारी दे दी। इसके बाद संजीवा कुमार ने डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल से इस पर ड्राफ्ट पेश करने को कहा। इस पर यूनाइटेड आरडीए के चेयरमैन डॉ. अंकित ओम का कहना है कि ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सभी राज्यों के कॉलेजों से सुझाव मंगाए हैं। उनका कहना है कि अगले सप्ताह के अंत तक ड्राफ्ट तैयार कर अतिरिक्त सचिव को भेज देंगे।