चौबेपुर/रामनगर। प्रदेश सरकार की ओर से घोषित बर्ड वाचिंग डे के अवसर पर शुक्रवार को वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कैथी स्थित गंगा-गोमती संगम के आसपास विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की गणना की। सर्वेक्षण में लगभग दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे गए, जिनमें प्रमुख रूप से साइबेरिया से आए डक की संख्या करीब पांच हजार से अधिक पाई गई। इसके अलावा मैना, भुजंगा, नीलकंठ, किंगफिशर, टिटहरी, मोर, फाख्ता, बगुला, गौरैया, कबूतर, अबाबील, सिरोही, सतभैया, हुदहुद, बुलबुल, बन मुर्गी आदि थे।
अध्ययन दल को सहयोग प्रदान कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता वल्लभाचार्य पांडेय ने बताया कि गंगा गोमती संगम क्षेत्र में शांति होने और प्रदूषण रहित होने के कारण यहां अनेक प्रकार के पक्षी रहते हैं। साथ ही कुछ दुर्लभ प्रजाति के पक्षी भी समय समय पर यहाँ आते रहते हैं। आसपास बड़े पेड़ों की उपलब्धता भी इन्हें प्रवास के लिए अनुकूल वातावरण देती है। अध्ययन दल में छात्र भी शामिल रहे जिन्होंने पक्षियों की गतिविधियों को कैमरे में कैद किया। काशी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी एनके सिंह के नेतृत्व में कैलाश पति यादव, सुदर्शन सिंह यादव, हरिश्चंद्र सिंह, प्रदीप सिंह आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे। इसी तरह काशी वन्य जीव विभाग की ओर से शुक्रवार को सुबह डोमरी गांव मे सतुआ बाबा के गोशाला के समीप बर्ड वाचिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राजकीय बाल सुधार गृह के 25 बच्चों ने भाग लिया। वन प्रभागीय वनाधिकारी गोपाल ओझा की अगुवाई मे गंगा किनारे रेत में बच्चों को घूमाया गया। बच्चो को नीलकंठ चिड़िया, गौरैया, कबूतर , मैना, महोवा, तोता, कोयल, बुलबुल समेत कई पक्षियों के बारे में पहचान कराई गई।