वाराणसी। न मां का पता न पिता का। जन्म लेते ही मां ने सड़क की पटरी पर छोड़ दिया था। उस अनाथ बेटी के जीवन में रविवार की रात हजार खुशियां बरस पड़ीं। उसने कभी सोचा तक नहीं था कि वह भी उसकी भी कभी डोली सजेगी और वह पिया के घर विदा होगी। लहुराबीर स्थित काशी अनाथालय में शहनाई की गूंज और मंगलचार की बेला हर किसी के लिए यादगार थी। बाजेगाजे के साथ आर्य समाज रीति से उषा के हाथ पीले हुए। सोमवार को वह पिया के विदा होगी।
करीब 18 वर्ष पहले लावारिस हाल में मिली दुधमुंही बच्ची उषा की रविवार की रात उत्सव भरे माहौल में धूमधाम से शादी रचाई गई। सांझ ढलते ही काशी अनाथालय के रानी राम कुमारी वनिता विश्राम गृह परिसर में बैंडबाजा बजने लगा। बारात सज धज कर पहुंची। राय गिरीश चंद्र, कुमार अग्रवाल, अरविंद शुक्ला, ओपी अग्रवाल, अधिशासी अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बारातियों की अगवानी की। वनिता विश्राम गृह की अधिक्षिका राम कुमारी तिवारी ने कन्या दान किया। भव्य सजे मंडप में उषा की शादी रानीपुर(महमूरगंज) निवासी देवानंद चंदानी के साथ हुई। उषा वनिता पब्लिक स्कूल की 12वीं की छात्रा है। संवासिनी गृह परिवार ने उसे उपहार में गहनों के अलावा गृहस्थी के सामान भी भेंट किए।