वाराणसी। भोजपुरी के जाने-माने गायक भरत शर्मा व्यास ने मंगलवार की रात फूलों से सजे मां दुर्गा के दरबार में भजनों के साथ पूर्वी-छपरहिया की प्रस्तुतियों से मौके को खास बना दिया। नृत्य, गायन की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों पर देर रात तक श्रद्धालु झूमते रहे। दुर्गा कुंड संगीत समारोह की चौथी निशा ऐसे ही भावों के साथ यादगार बनी।
शुभारंभ कृति पाठक की नृत्य की प्रस्तुति से हुआ। इनके बाद ओमकार पाल ने मां के चरणों में स्वरांजलि अर्पित की। उन्होंने शुरुआत की -दुष्ट हरे कष्ट हरे मां जगदंब भवानी... से। इसके बाद- बहे झीर झीर पुरबी बयरिया ना... से विदा ली। इनके पश्चात डॉ. पूनम पांडेय ने- दर पे तेरे हाजिरी दिनी मां... की प्रस्तुति की। समापन सोहर के बाद पचरा से किया। फिर पल्लवी पांडेय ने- तेरे चरण में आशा का फूल चढ़ाने आई हूं... सुनाया। फिर अर्थव मिश्रा का गायन हुआ। शुरुआत उन्होंने- क्या मोहन की रूप लुभानी... के बाद झूला धीरे से झुलावो बनवारी... की प्रस्तुति की। तबले पर संगत भोलानाथ मिश्र, हारमोनियम पर त्रिलोकी नाथ मिश्र ने की।
इसके बाद मंच संभाला भरत शर्मा ने। उन्होंने नीमिया की डारी मइया झूलेलीं झूलनवा... के बाद जेकरा मुहवां में खुनवा के लाली होई... के अलावा कई भजनों की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। उनका भजन सुनने के लिए मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। इनके बाद गायिका सुमन अग्रहरि ने भजनों की प्रस्तुति की। झूला झूलें सातों बहिनियां... जय काली जय काली जय काली मां.. हमसे भंगिया ना पिसाई... की प्रस्तुति की। इनके बाद गायक विजय कपूर, व्यास जी मौर्य, संगीता पंडित ने मां के चरणों में स्वरांजलि अर्पित की। कलाकारों का स्वागत पं. कौशल पति द्विवेदी ने किया। संचालन कृष्ण कुमार तिवारी व सोनू झा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन रामयश मिश्र ने किया।