वर्ष 2019-20 में 12, 2020-21 में 10, 2021-22 में 11 व वर्ष 2022-23 में अब तक बाल विवाह की छह कोशिशों को नाकाम किया गया है। बाल विवाह रोकने के बाद उनके अभिभावकों ने बाल कल्याण समिति के समक्ष शपथ पत्र दाखिल किया है कि वह अपने बच्चों की शादी तभी करेंगे, जब वह बालिग हो जाएंगे।
बाल संरक्षण अधिकारी निरूपमा सिंह ने बताया कि बालक का विवाह 21 साल, बालिका की उम्र 18 साल होने के बाद ही किया जा सकता है। यदि कोई भी व्यक्ति इस निर्धारित उम्र से पहले शादी करता है तो उसे बाल विवाह कहा जाता है। भले ही वह सहमति से ही क्यों न किया गया हो। सहमति से किया गया बाल विवाह भी कानूनी रूप से वैध नहीं होता। ऐसे में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम -2006 के तहत बाल विवाह होने पर दो वर्ष की सजा अथवा एक लाख का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
1098 के अलावा 181 महिला हेल्प लाइन, जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय, जिला बाल संरक्षण इकाई तथा बाल कल्याण समिति को भी बाल विवाह की सूचना दी जा सकती है।