यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इनमें से कौन-कौन लोग कॉलिंग का काम करते थे, किसकी क्या भूमिका थी और निवेश के नाम पर लोगों से रकम जुटाने की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित की जा रही थी। हिरासत में लिए गये सभी को साइबर थाना भेजा गया।
पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई रात करीब नौ बजे की गई। जिस कार्यालय में छापेमारी हुई, वहां एनकेडी एसोसिएट नाम से कंपनी का बोर्ड लगा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों द्वारा फोन पर लोगों से संपर्क किया जाता था।
उन्हें ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के जरिए कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाकर निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। आरोप है कि लोगों से लाख रुपये तक निवेश कराया जाता था। कुछ निवेशकों को शुरुआती दौर में रकम वापस कर या मुनाफा देकर भरोसा कायम किया जाता था, जबकि बाद में अन्य लोगों से भी बड़ी रकम निवेश कराने का प्रयास किया जाता था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि निवेश के नाम पर जुटाई गई रकम किन बैंक खातों में भेजी जाती थी और उसका आगे किस तरह इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस को प्रारंभिक पूछताछ में इन पैसों के लेनदेन से जुड़े कई सवालों के जवाब स्पष्ट रूप से नहीं मिले हैं।
पुलिस बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और कॉल सेंटर से मिले इलेक्ट्रॉनिक डाटा की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, कार्यालय में एनकेडी एसोसिएट के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इसी नाम से एक कंपनी के सेबी से पंजीकृत होने को बोर्ड लगा है। हालांकि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि महमूरगंज स्थित कार्यालय का उस पंजीकृत कंपनी से वास्तव में कोई संबंध था या नहीं।
आशंका है कि यदि किसी वास्तविक पंजीकृत संस्था के नाम और पहचान का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है तो लोगों में भरोसा पैदा करने के लिए ऐसा किया गया हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर में संभावित निवेशकों को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र और दस्तावेज दिखाए जाने की भी जानकारी मिली है। कॉल करने वाले खुद को किसी मल्टीनेशनल कंपनी का अधिकृत एजेंट बताकर लोगों को निवेश के लिए तैयार करते थे या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच
पुलिस टीम कार्यालय से मिले कंप्यूटर, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जांच के लिए अपने साथ ले गई है। इनमें मौजूद कॉलिंग डाटा, मोबाइल नंबर, चैट, ईमेल, बैंकिंग विवरण और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित कॉल सेंटर से कितने लोगों को फोन किया गया और अब तक कितने लोगों से निवेश कराया गया।
साइबर क्राइम टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि यदि निवेश के नाम पर ठगी की गई है तो इसके पीछे स्थानीय स्तर पर कितने लोग शामिल हैं और इसके तार किसी अन्य शहर या राज्य से जुड़े हैं या नहीं। बैंक खातों की जांच के बाद रकम के लेनदेन और संभावित लाभार्थियों की भूमिका भी सामने आने की उम्मीद है।