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काशी 11 हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन: कलश यात्रा में दिखी राम भक्ति, बालक देवाचार्य ने बताया महत्व; जुटे लोग

Fri, 31 Jul 2026 05:56 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी के पातालपुरी मठ, नरहरपुरा में नौ दिवसीय श्रीराम परिवार गाथा का शुभारंभ कलश यात्रा और 11 हजार पार्थिव शिवलिंगों के पूजन के साथ हुआ। जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीराम की गुरुभक्ति ने इतिहास को गुरु-शिष्य परंपरा दी। पहले दिन श्रीराम के जन्म से लेकर गुरु भक्ति तक की गाथा सुनाई गई।
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नौ दिवसीय श्रीराम परिवार गाथा का शुभारंभ हुआ। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पातालपुरी मठ, नरहरपुरा में गुरुवार से नौ दिवसीय श्रीराम परिवार गाथा का शुभारंभ हुआ। पातालपुरी सनातन धर्म रक्षा परिषद और विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज के सानिध्य में भव्य कलश शोभायात्रा से हुई। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 11 हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन कराया गया।

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गाजे-बाजे के साथ निकली कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मठ परिसर में वैदिक ब्राह्मणों और बटुकों ने जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज के आचार्यत्व में विधि-विधान से कलश स्थापना की। आयोजन समिति के अनुसार अगले 11 दिनों तक प्रतिदिन सुबह 11 हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन किया जाएगा। वहीं प्रतिदिन शाम पांच बजे से श्रीराम परिवार गाथा का आयोजन होगा।

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गाथा के पहले दिन भगवान श्रीराम के जन्म, शिक्षा और गुरु भक्ति से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान राम का परिवार भारतीय संस्कृति और आदर्श जीवन का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि श्रीराम के जीवन, शिक्षा और गुरु के प्रति समर्पण ने समाज को उच्च आदर्श दिए हैं। यही कारण है कि अनेक आक्रमणों के बावजूद भारत की संस्कृति और संस्कार आज भी अक्षुण्ण बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम की गुरुभक्ति ने गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत आधार दिया, जो आज भी समाज और परिवार को दिशा प्रदान कर रही है।

कार्यक्रम में वक्ता डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि विश्व का पहला प्रामाणिक इतिहास महर्षि वाल्मीकि की रामायण में मिलता है और उसमें वर्णित घटनाएं साक्ष्यों पर आधारित हैं। महंत अवध किशोर दास ने कहा कि यदि दुनिया श्रीराम के आदर्शों और उनके परिवार की मर्यादाओं को अपनाए तो समाज और परिवारों में बढ़ रहे संघर्ष स्वतः समाप्त हो सकते हैं। इस अवसर पर महंत जगदीश्वर दास, डॉ. कविंद्र नारायण, उमेश श्रीवास्तव, नाजनीन अंसारी, संजय भारद्वाज, अमित राजभर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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