गाथा के पहले दिन भगवान श्रीराम के जन्म, शिक्षा और गुरु भक्ति से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान राम का परिवार भारतीय संस्कृति और आदर्श जीवन का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि श्रीराम के जीवन, शिक्षा और गुरु के प्रति समर्पण ने समाज को उच्च आदर्श दिए हैं। यही कारण है कि अनेक आक्रमणों के बावजूद भारत की संस्कृति और संस्कार आज भी अक्षुण्ण बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम की गुरुभक्ति ने गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत आधार दिया, जो आज भी समाज और परिवार को दिशा प्रदान कर रही है।
कार्यक्रम में वक्ता डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि विश्व का पहला प्रामाणिक इतिहास महर्षि वाल्मीकि की रामायण में मिलता है और उसमें वर्णित घटनाएं साक्ष्यों पर आधारित हैं। महंत अवध किशोर दास ने कहा कि यदि दुनिया श्रीराम के आदर्शों और उनके परिवार की मर्यादाओं को अपनाए तो समाज और परिवारों में बढ़ रहे संघर्ष स्वतः समाप्त हो सकते हैं। इस अवसर पर महंत जगदीश्वर दास, डॉ. कविंद्र नारायण, उमेश श्रीवास्तव, नाजनीन अंसारी, संजय भारद्वाज, अमित राजभर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।